एलटीटी एक्सप्रेस उद्घाटन विवाद: महापौर से माफी मांगने पहुँचे रेलवे अधिकारी, महापौर का तंज- “यह सिर्फ चूक नहीं, दबाव का फैसला” धनबाद–मुंबई (लोकमान्य तिलक टर्मिनस) साप्ताहिक एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह में आमंत्रण रद्द किए जाने से पैदा हुए विवाद के बाद रेलवे प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। मंगलवार को धनबाद रेल मंडल के अधिकारी सीनियर डीसीएम और डीओएम सिंह मेंशन पहुंचे और पूरे मामले पर खेद जताते हुए अपनी गलती स्वीकार की। अधिकारियों ने संबंधित जनप्रतिनिधियों से औपचारिक माफी मांगते हुए इसे प्रशासनिक चूक बताया। रेलवे अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि आगे से सभी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल, समन्वय और संचार व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि किसी भी जनप्रतिनिधि को असहज स्थिति का सामना न करना पड़े। वहीं, इस पूरे मामले में महापौर संजीव सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि दबाव में लिया गया निर्णय प्रतीत होता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर किसी की ब्लड प्रेशर उनकी मौजूदगी से बढ़ रही है तो उसका इलाज बाघमारा, धनबाद या दिल्ली में कराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सभी जनप्रतिनिधियों का सम्मान होना चाहिए चाहे वे पक्ष में हों या विपक्ष में। किसी को

आमंत्रित कर अंतिम समय में रोकना न केवल व्यक्ति का, बल्कि उस क्षेत्र की जनता का भी अपमान है जिसने उन्हें चुनकर भेजा है। धनबाद-मुंबई (लोकमान्य तिलक टर्मिनस) साप्ताहिक एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह से पहले आमंत्रण रद्द किए जाने के फैसले ने कोयलांचल की सियासत को गरमा दिया है। रेलवे द्वारा झरिया विधायक रागिनी सिंह और धनबाद के महापौर संजीव सिंह को पहले आमंत्रित करना और फिर ऐन वक्त पर उनका निमंत्रण रद्द करना अब बड़े विवाद का रूप ले चुका है। इस फैसले से आक्रोशित भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को झरिया में विरोध प्रदर्शन करते हुए धनबाद रेल मंडल के डीआरएम अखिलेश मिश्रा का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इसे जनप्रतिनिधियों का अपमान बताया। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि 3 अप्रैल को जारी आधिकारिक पत्र के माध्यम से महापौर संजीव सिंह और विधायक रागिनी सिंह को विधिवत आमंत्रित किया गया था। इतना ही नहीं, कार्यक्रम स्थल पर उनके नाम के बैनर और पोस्टर भी लगाए गए थे। ऐसे में अंतिम समय पर आमंत्रण रद्द करना कई सवाल खड़े करता है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि किसी दबाव में लिया गया निर्णय प्रतीत होता है। उन्होंने रेलवे प्रशासन से स्पष्ट जवाब की मांग करते हुए कहा कि आखिर किसके दबाव में यह फैसला लिया गया। अब सवाल यह उठता है कि ये सब अगर राजनीति दबाव में हुआ है तो राजनीति करने वाला अनाड़ी है क्योंकि राजनीति के फेरे लगते सीधे पर पड़ते उल्टे । लोगो का सहानुभूति और समर्थन बटोरने में मेयर संजीव सिंह यहां सफल नजर आ रहे हैं।

