झारखंड की डीजीपी तादाशा मिश्रा जी ने देर रात हजारीबाग पहुंची फिर पुलिस ने इस बड़े मामले का किया खुलासा। आरोपियों ने पहले घटना को अंजाम दिया फिर साक्ष्य छुपाने और मामले से ध्यान भटकाने के लिए इसे अलग रंग देने की भरपूर कोशिश की। लेकिन कानून के हाथ लंबे होते है वो इस घटना में भी दिख गया । हजारीबाग के विष्णुगढ़ स्थित कुसुम्भा गांव में अंधविश्वास की एक ऐसी खौफनाक दास्तान सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। एक मासूम नाबालिग बच्ची, जिसे अपनी मां के आंचल में सबसे ज्यादा सुरक्षित होना चाहिए था, वह अपनी ही सगी मां और एक तांत्रिक महिला के क्रूर इरादों की भेंट चढ़ गई। इस हृदयविदारक घटना को तांत्रिक क्रियाओं और नरबलि के नाम पर अंजाम दिया गया, जहां बच्ची की मां रेशमी देवी अपनी बेटी की बीमारी ठीक कराने के लिए तांत्रिक भगतिनी के झांसे में आ गई। अष्टमी की काली रात को

जब पूरा गांव उत्सव में डूबा था, तब एक घर के भीतर मासूम की चीखें अंधविश्वास के शोर में दबा दी गईं। तांत्रिक के कहने पर मां ने अपनी ही लाडली के पैर पकड़े और तांत्रिक ने गला घोंटकर उसकी जान ले ली। इसके बाद जो बर्बरता हुई वह रूह कंपा देने वाली थी। बच्ची के खून से पूजा की गई और फिर शव को बगीचे में फेंक दिया गया। हालांकि, हजारीबाग पुलिस और विशेष एस.आई.टी. टीम ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए इस काले सच का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने हत्यारी मां, मुख्य आरोपी तांत्रिक भगतिनी और उनके सहयोगी भीम राम को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। यह घटना समाज के लिए एक कड़ा सबक है कि अंधविश्वास के रास्ते केवल विनाश और अपराध की ओर ले जाते हैं।

