खबर कैमूर से है जहां दो भाईयों की जोड़ी बना चर्चा का विषय नवरात्रि में मां मुंडेश्वरी के मंदिर की सजावट में करते लगभग करोड़ रुपए खर्च,देश विदेश से मंगाते है महंगे फूल और माला उसके बाद होता है मां मुंडेश्वरी मंदिर का भव्य सजावट,मंदिर के कु व्यवस्था को देख दोनों भाइयों में जागा आस्था का सागर,तभी से मां मुंडेश्वरी मंदिर के सजावट में करते हैं लगभग करोड़ रुपए का खर्च,बता दें कि मां मुंडेश्वरी मंदिर के नीचे कुछ दूर पर भगवानपुर प्रखंड के उमापुर में रहते हैं दो भाई बड़ा भाई नागेंद्र दुबे वहीं दूसरा सोनू दुबे,जो जिला प्रशासन और मंदिर के संस्था से अलग अकेले अपने दम पर शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि के अष्टमी के दिन कराते हैं मंदिर की सजावट,वहीं नागेंद्र दुबे ने बताया कि मेरे छोटे भाई का मन हमेशा से ही आस्था से जुड़ा हुआ है, आज से 7 साल पहले जब हम लोग मां मुंडेश्वरी मंदिर में अष्टमी के दिन निशा पूजा पर मां का दर्शन करने गए थे, जहां भक्तों का भीड़ अंधेरे में मां मुंडेश्वरी का दर्शन करने पहुंचे थे, वहीं इस व्यवस्था को देख दोनों भाइयों का मन विचलित हो गया, जिसके बाद दोनों भाइयों में एक आस्था का सागर जागा जिसके बाद 5 सालों से देश

विदेश से फुल माला मंगाकर मां मुंडेश्वरी के मंदिर को सजवाते आ रहे हैं, जो देखने में काफी मन मोहक लगता है। और नवरात्रि के अष्टमी के दिन निशा पूजा पर मंदिर के परवा पहाड़ी को नीचे से ऊपर तक लाइट से सजाया जाता है, ताकि मां की महिमा पूरे देश में विख्यात रहे, वहीं सोनू दुबे ने बताया कि मन में मां के प्रति काफी भक्ति है जिसको लेकर हमलोग 5 सालों से मंदिर को सजवाते हैं, जिसमें थाईलैंड सहित भारत देश के कई नामी शहरों से फूल माला मंगाया जाता है और मां की मंदिर को सजाया जाता है,अष्टमी के दिन सजावट लाइट से लेकर सभी तरह की सुविधाएं हम दोनों भाइयों के तरफ से ही किया जाता है, यह एक आस्था है मां हर साल अपना श्रृंगार खुद तय करती हैं, जिसको मां मुंडेश्वरी का श्रृंगार किया जाता है, उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी चमत्कार की बात तो यह है कि यहां बकरे की बलि तो दी जाती है लेकिन बकरा पुनः जीवित बाहर आता है यह परंपरा सदियों से अनोखी है, यहां के लोग इसे चमत्कार कहते हैं और रक्त विहीन बलि कहा जाता है।

