20-20 डिसमिल जमीन विधायकों को दी जाएगी। सूत्रों के हवाले से खबर है कि झारखंड की हेमंत सोरेन की सरकार, पूर्व और वर्तमान कुल 109 विधायकों को 20-20 डिसमिल जमीन देने जा रही है। फैसला तो अच्छा है लेकिन हर काम के पीछे कोई न कोई मकसद अवश्य होता है ठीक उसी तरह जैसे ,तरह तरह के प्रलोभन जनता को देकर हेमंत सोरेन फिर से सत्ता में आ गए हैं। अब बात यह है कि आखिर इसके पीछे क्या मकसद छिपा है? राज्य की जनता को विचार करना चाहिए। झारखंड राज्य के मुस्लिम पर्सनल लॉ के ,प्रांतीय अध्यक्ष मुर्तजा आलम जी ने इस पर खेद प्रकट करते हुए अपना बयान दिया है कि जो विधायक सिर्फ एक बार विधायक बनने

के बाद अरबपति हो जाते हैं तरह तरह के तरीके अपनाकर जनता और सरकार को लूटते हैं आखिर उन्हीं पर मुख्यमंत्री इतने मेहरबान क्यों हो रहे हैं। हां यदि उनको इतना ही मेहरबान होना है तो अपनी निजी संपत्ति विधायकों को दे,दें। जनता की संपत्ति राज्य की जमीन इस प्रकार लुटाने का हक उन्हें किस ने दे दिया? लाभान्वित होने वाले विधायक को भला क्या आपत्ति हो सकती है फिर चाहे वो पक्ष में हो या विपक्ष में ।

