अन्नदा कॉलेज, हजारीबाग में “Environmental Risks, Vulnerabilities & Adaptation Strategies (EVA)” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन सत्र गुरुवार को कॉलेज स्थित हॉल में दीप प्रज्वलन के साथ शुभारंभ हुआ। इस सेमिनार का आयोजन अन्नदा कॉलेज द्वारा झारखंड राज्य उच्च शिक्षा परिषद, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार, एनटीपीसी, डीवीसी तथा एनएमएल के सहयोग से किया गया है। उद्घाटन सत्र में मुख्य संरक्षक के प्रतिनिधि के रूप में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो मिथलेश सिंह उपस्थित रहे। सेमिनार के संयोजक डॉ. अजय प्रसाद वर्मा (हिंदी विभागाध्यक्ष, अन्नदा कॉलेज) ने सेमिनार की रूपरेखा और इसकी विशेषताओं के बारे में जानकारी दी।प्रबंधन समिति के सचिव सह सेमिनार पैट्रन डॉ. सजल मुखर्जी ने स्वागत भाषण देते हुए सेमिनार के उद्देश्य और इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर कॉलेज की ओर से एक सुवेनियर का भी विमोचन किया गया, जिसमें विभिन्न विशिष्ट व्यक्तियों के शुभकामना संदेशों के साथ-साथ सेमिनार में प्रस्तुत शोधपत्रों के संक्षिप्त विवरण प्रकाशित किए गए हैं। उद्घाटन सत्र को संबंधित करते हुए स्वीडन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय की प्रो. (डॉ.) स्वाति पराशर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज वैश्विक स्तर की गंभीर चुनौती बन चुका है और इसके समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ स्थानीय स्तर पर जन-जागरूकता जरूरी है। श्रीलंका के बौद्ध एवं पाली विश्वविद्यालय की प्रो. (डॉ.) निरोशा सल्वथुरा ने पर्यावरण संरक्षण में समाज की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया, जबकि भूटान के रॉयल यूनिवर्सिटी के प्रो. (डॉ.) ओम काटेल ने प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और सतत विकास की आवश्यकता पर बल दिया। राष्ट्रीय स्तर के वक्ताओं में बोडोलैंड विश्वविद्यालय की प्रो. (डॉ.) ए. इबेमचा चानू ने पूर्वोत्तर भारत में पर्यावरणीय चुनौतियों पर प्रकाश डाला। प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं लेखक श्री पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी नीतियों का विषय नहीं बल्कि समाज की सामूहिक

जिम्मेदारी है। रांची विश्वविद्यालय के डॉ. नितीश प्रियदर्शी ने झारखंड में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अपने विचार रखे। केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के डॉ. भास्कर सिंह ने पर्यावरणीय जोखिमों के वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता बताई, जबकि विश्व-भारती शांतिनिकेतन के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. उमा शंकर मलिक ने भूगोल और पर्यावरण अध्ययन के माध्यम से सतत विकास की संभावनाओं पर चर्चा की। करीम सिटी कॉलेज की डॉ. बसुधारा रॉय ने भी पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके समाधान पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में डीवीसी के वरिष्ठ महाप्रबंधक एवं परियोजना प्रमुख श्री राम स्नेह शर्मा तथा एनएमएल के परियोजना प्रमुख श्री पवन कुमार रावत भी सहयोगी भागीदार के रूप में जुड़े। सोसायटी फॉर सस्टेनेबिलिटी जो महाविद्यालय का पर्यावरणीय मुद्दों पर कार्य के लिए साझेदार भी है (NGO) के गौरव सागर राणा ने भी महाविद्यालय के साथ कार्यों का रिपोर्ट रखा। जिला वन विभाग के अधिकारी श्री मौन प्रकाश सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व तथा इस दिशा में संस्थानों की भूमिका पर अपने विचार रखे। उद्घाटन सत्र का धन्यवाद सह आभार ज्ञापन अन्नदा महाविद्यालय प्राचार्य सह सेमिनार अध्यक्ष डॉ नीलमणि मुखर्जी ने किया। भोजनावकाश के बाद सेमिनार के दो तकनीकी सत्रों में विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, शोधार्थियों और छात्रों ने भी अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए, जिनमें पर्यावरणीय जोखिम, जलवायु परिवर्तन और अनुकूलन रणनीतियों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विचार और तथ्य सामने आए। शाम के समय छात्र-छात्राओं द्वारा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। आयोजकों ने बताया कि सेमिनार के दूसरे दिन 13 मार्च को भी विभिन्न तकनीकी सत्रों और विचार-विमर्श के माध्यम से पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा जारी रहेगी। इस अवसर पर महाविद्यालय के शासी निकाय के सभी सदस्य , महाविद्यालय के सभी अध्यापक मौजूद रहे।

