तेजस्वी यादव का आरोप है कि बीजेपी-एनडीए आरक्षण चोर हैं। 17 महीनों में बिहार सरकार ने जातिगत गणना के आधार पर दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के लिए 65% आरक्षण बढ़ाया, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया और केस में फँसा दिया। इस वजह से बिहार में 3,50,000 से अधिक प्रक्रियाधीन नौकरियों में यह आरक्षण लागू नहीं हो पाया। परिणामस्वरूप लगभग 50,000 युवाओं को

नौकरी से हाथ धोना पड़ा। तेजस्वी यादव सभी वर्गों से अपील कर रहे हैं कि वे एकजुट हों और आरक्षण चोर बीजेपी-एनडीए को सबक सिखाएँ। आरक्षण की लड़ाई सिर्फ नौकरी तक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की रक्षा की लड़ाई है।

