हजारीबाग विभावि राजनीति विज्ञान विभाग में शोध पद्धति पर व्याख्यान समसामयिक विषयों पर करें शोध: डॉ संजू कुमारी कट-एंड-पेस्ट संस्कृति से बचे शोधार्थी: डॉ रेनू बोस शोध नैतिकता का करें पालन: प्रो बीपी सिंह समसामयिक विषयों में पीएचडी शोध होनी चाहिए। यह समय की भी मांग है। राजनीति विज्ञान का एक बड़ा सा भाग परिवर्तनशील है। विश्व की राजनीति, भारत की राजनीति तथा अपने झारखंड राज्य की राजनीति के समकालीन मुद्दों पर शोध करने की आवश्यकता है। उक्त बातें विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष तथा राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ संजू कुमारी ने कही। डॉ संजू बुधवार को विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में बतौर मुख्य अतिथि शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को संबोधित कर रही थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ सुकल्याण मोइत्रा ने किया। डॉ संजू ने बताया कि राजनीति विज्ञान विभाग में शोध के नियम कुछ भिन्न है। इसमें ऐतिहासिक पद्धति का बहुत महत्व है। इसमें प्राथमिक डेटा संकलन के लिए अनुभाविक पद्धति तथा उसके अंतर्गत प्रश्नावली, अनुसूची एवं साक्षात्कार जैसे टूल्स के उपयोग किए जाते हैं। विभावि के समाज विज्ञान संकाय के अध्यक्ष डॉ रेनू बोस ने इस अवसर प्राथमिक डेटा संकलन के महत्व को बताया। उन्होंने बताया की राजनीति विज्ञान जैसे विषय में वर्तमान

का अध्ययन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान का अध्ययन तभी विश्वसनीय व गुणात्मक होगा जब शोध में प्राथमिक डेटा का संकलन वैज्ञानिक पद्धति से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पीएचडी की थीसिस में फिगर्स के अपने महत्व होते हैं एवं शोधार्थियों को आकृति एवं रेखाचित्र का सहारा लेनी चाहिए। डॉ रेनू बोस ने बताया की उपलब्ध साहित्य की समीक्षा अपनी भाषा में करनी चाहिए। उन्होंने अगाह किया की कट-एंड-पेस्ट संस्कृति से विद्यार्थी बचे। यह भी जानकारी दी कि अब ‘प्लेगिरिज्म’ अर्थात साहित्यिक चोरी की जांच हेतु सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है। इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए विनोबा भावे विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान के पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो बालेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि शोध के लिए चयनित विषय का सीधा संबंध शोध समस्या से होनी चाहिए। उन्होंने शोध पद्धति को ‘शोध की आत्मा’ बताया। डेविड ईस्टन का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि आज के दौर में शोध के लिए वैज्ञानिक पद्धति को अपनाना श्रेयस्कर है। यह भी बताया कि शोध का विषय बहुत व्यापक नहीं होनी चाहिए अपितु यहां किसी निश्चित विषय पर केंद्रित होनी चाहिए। प्रो बालेश्वर ने बताया की शोध नैतिकता (Research Ethics) का पालन होनी चाहिए। तभी हम अर्थपूर्ण शोध द्वारा समाज के ऋण को चुका सकेंगे। इस अवसर पर मानव विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ विनोद रंजन, शिक्षाशास्त्र विभाग के डॉ मृत्युंजय प्रसाद, विभाग के शोधार्थी तथा प्रथम समसत्र के विद्यार्थी उपस्थित हुए।

