पटना यूनिवर्सिटी में दलित और पिछड़े छात्रों के नामांकन रद्द होने के बाद बवाल मच गया। छात्रों ने विश्वविद्यालय के गेट पर जोरदार प्रदर्शन किया और अपने अधिकारों की मांग की। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनका नामांकन बिना किसी स्पष्ट कारण के रद्द किया गया है। प्रदर्शन में छात्रों ने नारों के माध्यम से प्रशासन पर आरोप लगाए और जल्द से जल्द उनके नामांकन बहाल करने की मांग की। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले

की जांच शुरू कर दी है, लेकिन छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस घटना ने छात्रों और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच तनाव बढ़ा दिया है। कई छात्र इसे समाज में पिछड़े और दलित वर्ग के खिलाफ अन्याय मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई जरूरी है, ताकि छात्रों का भरोसा शिक्षा संस्थानों पर बना रहे।

