हजारीबाग: दस दिवसीय शैक्षणिक परिभ्रमण से लौटा शिक्षाशास्त्र विभाग का दल

हजारीबाग: दस दिवसीय शैक्षणिक परिभ्रमण से लौटा शिक्षाशास्त्र विभाग का दल

दस दिवसीय शैक्षणिक परिभ्रमण से लौटा शिक्षाशास्त्र विभाग का दल संग्रहालय में दिखा हजारीबाग के लोगों द्वारा गांधीजी को दिया गया उपहार सरदार पटेल को प्राप्त भारत रत्न को देखकर विद्यार्थी हुए अभिभूत: डॉ रजनीश कुमार कुलपति के कारण मिला जीवन का स्वर्णिम अनुभव: डॉ अमिता कुमारी विनोबा भावे विश्वविद्यालय का शिक्षाशास्त्र विभाग के 24 सदस्य का दल 10 दिनों का गुजरात के प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान ‘गुजरात विद्यापीठ’ तथा ‘भारतीय शैक्षिक प्रशिक्षण संस्थान’ का परिभ्रमण पूर्ण कर सकुशल लौट आया है। सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए भ्रमण दल के प्रभारी, शिक्षक डॉ अमिता कुमारी एवं डॉ रजनीश कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर चंद्रभूषण शर्मा की दूरदर्शी सोच से घमंडल को मिला जीवन का स्वर्णिम अनुभव। अपने अनुभवों को साझा करते हुए दोनों ने बताया कि भ्रमण के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा, एक भारत श्रेष्ठ भारत पर चर्चा परिचर्चा कर कई अनुभवों को प्राप्त किया। खास बात कि विद्यार्थी भारतीय कला, संस्कृति को स्वयं अपने ज्ञानेंद्रियों के द्वारा समझे। वे साबरमती आश्रम, गांधी कुटीर, साइंस सिटी, अक्षरधाम के साथ आदिवासी संग्रहालय, संस्कृति संग्रहालय तथा महात्मा गांधीजी और लोहपुरुष सरदार पटेलजी के संग्रहालय का भी भ्रमण किया।

संग्रहालय में इन्होंने हजारीबाग नगर निगम द्वारा गांधी जी को दिए गए मानपत्र को देखा जो 18 सितंबर 1925 को दिया गया था। साथ ही हजारीबाग के लोगों के द्वारा गांधी जी को दी गई उपहार को भी वहां संग्रहालय में देखा। ‘जनता जिला’ हजारीबाग के द्वारा भी एक मानपत्र संग्रहालय में रखी हुई थी जो गांधीजी को दिया गया था। इसके साथ सरदार पटेल को दिया गया भारत रत्न पुरस्कार भी देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शिक्षक द्वय ने बताया कि गांधीजी ने दांडी यात्रा के दौरान गुजरात विद्यापीठ में पहला पड़ाव किया था। उस स्थान को भी देखने का मौका मिला। मूर्तियों के रेप्लिका का संग्रह आदि को देखकर पूरा दल विस्मित और अभिभूत हुआ। बताया की शिक्षक एवं विद्यार्थी कई महत्वपूर्ण जानकारी एवं अनुभवों के साथ वापस लौटे हैं। डॉ अमित एवं डॉ रजनीश ने आगे बताया कि गांधीनगर मॉडल के अंतर्गत यह भी अनुभव किया कि आधुनिक दौर में कैसे किसी शहर का रखरखाव और संचालन किया जाना चाहिए। सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुती के द्वारा सांस्कृतिक आदान प्रदान में विद्यार्थियों ने बढ़-कर कर हिस्सा लिया। झारखंड की कला और संस्कृति से वहां के विद्यार्थी एवं शिक्षकों को अवगत कराया। दोनों शिक्षकों ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा को पुनः धन्यवाद दिया कि उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए शिक्षाशास्त्र विभाग का चयन किया।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *