झारखण्ड देश का एक मात्र राज्य है,जहां पत्रकारों को नहीं मिल रही कोई सुविधा : शाहनवाज हसन पत्रकारिता समाज की दशा एवं दिशा तय करती है,पहले पत्रकारिता मिशन थी अब प्रोफेशनल बन गया है : संपूर्णानंद भारती पत्रकारिता की मूल मंत्र विश्वसनीयता एवं सत्यता पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगनी चाहिए बड़कागांव। हमारा दुर्भाग्य है कि झारखंड सरकार पत्रकारों को कोई सुविधा नहीं दे रही है। झारखंड सरकार पत्रकारों के लिए गूंगी बहरी की सरकार बन गई है। जबकि मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में पत्रकार पेंशन योजना, पत्रकार स्वास्थ बीमा योजना सहित अन्य योजनाएं लागू है। पिछले बजट में पत्रकारों के लिए की गई घोषणाओं को आज तक धरातल पर नहीं उतारा गया। उक्त बातें भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ एवं झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के संस्थापक शाहनवाज हसन ने मुख्य अतिथि के बतौर सीसीएल पिपरवार क्षेत्र के बचरा ऑफिसर क्लब में भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ की झारखंड राज्य इकाई झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले पिपरवार नगर कमेटी के नेतृत्व में पत्रकारों का “डिजिटल मीडिया की विश्वसनीयता एवं चुनौतियां” विषय पर एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय सम्मेलन सह कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। कार्यशाला की अध्यक्षता जर्नलिस्ट एसोसिएशन के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष संपूर्णानंद भारती और संचालन रविंद्र कुमार सिंह एवं मासूम अंसारी ने संयुक्त रूप से किया।कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया गया।श्री हसन ने आगे कहा कि विधायक- मंत्रियों के बीमार पड़ने पर उन्हें चार्टर प्लेन से इलाज के लिए भेजा जाता है जबकि एक पत्रकार जब दुर्घटना में घायल होता है तो राज्य सरकार की ओर से तत्काल कोई सहायता प्रदान नहीं की जाती। झारखण्ड आज पत्रकारों के लिए सबसे बुरे राज्य की श्रेणी में अंतिम पायदान पर खड़ा है, यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हम सभी अब मजबूती से आवाज़ बुलंद कर चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि निष्पक्ष पत्रकारिता चुनौती भरा संघर्ष होती है। पत्रकारिता का मूल मंत्र है आईना बनकर खबर को प्रकाशित करना। तेल मसाला लगाकर पत्रकारिता नहीं चाटुकारिता होती है। जन सरोकारों से जुड़ी खबरें ही प्रकाशित करना विश्वसनीयता पत्रकारिता है।

आज के दौड़ में ब्लैक मेलिंग और शराब की जुगाड़ के लिए लोग पत्रकारिता से जुड़ रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि पत्रकारिता क्षेत्र के सामुदायिक सौहार्द बनाने के लिए होनी चाहिए ना कि भड़काने के लिए। “डिजिटल मीडिया की विश्वसनीयता एवं चुनौतियां” विषय पर झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संपूर्णा नंद भारती ने कहा कि पत्रकारों के समक्ष कई चुनौतियां होती है। पहले पत्रकारिता मिशन हुआ करती थी अब प्रोफेशनल हो गया है। पहले की पत्रकारिता में सत्यता एवं विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया जा सकता था। पत्रकारिता समाज की दशा एवं दिशा तय करती है। लेकिन डिजिटल मीडिया में सिर्फ सूचनात्मक खबर प्रकाशित होती है।श्री भारती ने कहा कि अब हम डिजिटल युग में हैं। डिजिटल मीडिया की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है एवं चुनौतियों से घिरी हुई है। डिजिटल मीडिया ने समाचार की दुनिया में एक नई क्रांति का संचार किया है। हर व्यक्ति जो डिजिटल प्लेटफार्म से जुड़ा है वह घटनाओं को अपने मोबाइल में कैद कर उसे पोस्ट कर रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया के पत्रकारों के लिए यह ज़रूरी है कि वे अपनी सीमाओं को जानें, कोड ऑफ कंडक्ट सब पर लागू होता है। सबसे पहले कौन….. की रेस में हम बिना पड़ताल के किसी खबर को नहीं चलाएं। सावधानी एवं धैर्य से खबर प्रकाशित होनी चाहिए। किसी की प्रतिष्ठा को हनन करने के लिए खबर प्रकाशित नहीं होनी चाहिए। मीडिया के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती उनके द्वारा भ्रष्टाचार को उजागर करने पर होता है। श्री भारती ने कहा कि पत्रकारों पर झूठे मुकदमा की जाती है ताकि भ्रष्टाचार का उजागर नहीं हो। उन्होंने कहा कि हम संगठित रहकर ही इन चुनौतियों से निपट सकते हैं। विशिष्ट अतिथि सीसीएल महाप्रबंधक ईएंडटी एसके सिंह ने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शिता पत्रकारिता काफी जरूरी है। मिसयूज पत्रकारिता से बचने की आवश्यकता है। संघ को सशक्त बनाने के लिए इस तरह की कार्यशाला समय-समय पर होती रहनी चाहिए।वर्तमान में डिजिटल मीडिया के प्लेटफार्म पर भ्रामक खबर को रोकना निष्पक्ष पत्रकारों का कर्तव्य है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के सिमरिया विधानसभा प्रभारी मनोज चंद्रा ने कहा कि दूसरे राज्यों की तर्ज पर झारखंड में भी पत्रकारों को सुविधा मिलनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने जल्द ही संगठन के प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्य के मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें समस्या से अवगत कराने की बात कही।

