सदर प्रखंड के जानकीनगर की एक महिला वर्षों से मानसिक बीमारी से जूझ रही थी। उस महिला की इतने सालों तक किसी ने उसकी सुध नहीं ली। समाज के बीच रहते हुए भी वह अकेली और थी। उसका पति बेहद गरीब है। बीमारी की मार और खाली जेब के कारण उसका घर संसार टूटने की कगार पर था। अज़हर इस्लाम ने इंसानियत के नाते परिवार का साथ देने का निर्णय लिया ताकि उसकी रोज़ी-रोटी चलती रहे।

अज़हर ने मैंने अपने ही स्थान उसके पति को बिना किसी भाड़े के बिना किसी शर्त के चाय की दूकान दिलवाया एवं उक्त महिला का पूरा मेडिकल खर्च रांची के काके में चल रहा है। अज़हर ने कहा कि उन्होंने यह वादा किया है कि ईलाज का एवं रांची आने-जाने का पूरा खर्च वे खुद वहन करेंगे। अज़हर ने कहा कि मेरे लिए सेवा कोई एहसान नहीं है, सेवा इंसानियत की पहचान है। गरीब के साथ रहना, गरीब के पास रहना और गरीब की सेवा करना यही मेरी राजनीति में आने का असली उद्देश्य है।

