विभावि में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रोफेसर सरोज शर्मा ने कहा कि भाषा में शब्द, दर्शन और वैज्ञानिकता साथ-साथ चलते हैं। उन्होंने जेन-जी की स्लैंग भाषा पर चिंता जताई और कहा कि नई पीढ़ी को अपनी भाषा को परिष्कृत करना होगा। कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल वेद और पुराणों में नहीं, बल्कि जनजातीय भाषाओं

में भी निहित है। केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) के निदेशक प्रो शैलेंद्र मोहन ने 88 जनजातीय भाषाओं की “प्रवेशिका”, 70 लुप्त भाषाओं की “भाषा संचिका” और बहुभाषा शब्दकोश जैसे प्रयासों की जानकारी दी। आयोजन सचिव डॉ विनोद रंजन ने बताया कि संगोष्ठी में कुल 152 आलेख प्रस्तुत किए गए। उन्होंने जोर देकर कहा कि विजन 2047 तभी साकार होगा जब हम अपनी भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन करेंगे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।

