UGC के खिलाफ स्वर्ण समाज का हल्लाबोल, परशुराम सेना और करणी सेना ने निकाला आक्रोश मार्च, प्रधानमंत्री का फूंका पुतला, किया केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी एंकर—: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की हालिया नीतियों के विरोध में कैमूर जिले में स्वर्ण समाज का गुस्सा फूट पड़ा, जहां परशुराम सेना, करणी सेना और समस्त स्वर्ण समाज के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार आक्रोश मार्च निकाला और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की, यह आक्रोश मार्च भभुआ शहर के नगर पालिका मैदान से निकाला गया था जो पूरे शहर में घूमकर एकता चौक पर समाप्त हुआ, जहां भारत सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष विनोद तिवारी और करणी सेना प्रदेश प्रवक्ता प्रिंस सिंह ने बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के रुख पर संतोष जताया,उन्होंने UGC के विवादास्पद फैसलों पर कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का स्वागत करते हुए न्यायपालिका को धन्यवाद दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि कोर्ट की रोक

एक सकारात्मक कदम है,लेकिन यह अंतिम जीत नहीं है,जब तक UGC को पूर्ण रूप से हटाया नहीं जाता या स्वर्ण समाज के हितों के खिलाफ नीतियों को वापस नहीं लिया जाता, तब तक हमारा यह आक्रोश मार्च और आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा,हम अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्र एक समान होते हैं, लेकिन यह भाजपा की सरकार उसमें भी विवाद कराने का काम कर रही है, पहले हिन्दू मुस्लिम को धर्म के नाम पर लड़वाया उसके बाद महादलितों को एस सी एसटी स्वर्ण में जाति के नाम पर लड़वाया और अब ऊंच नीच दिखाकर यूजीसी कानून के नाम पर लड़वाना चाहता है,अगर सरकार की यही नीति रही तो आने वाले देश में लोग जाती धर्म के नाम पर लड़कर मर जाएंगे और देश में आग का गोला बरसेगा, इसलिए हमलोग मांग करते हैं कि यूजीसी कानून को वापस लिया जाय। आक्रोश मार्च में परशुराम सेना और करणी सेना के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए,स्थानीय लोगों और स्वर्ण समाज के युवाओं ने भी इस प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे समाज की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेंगे और आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और भी धार दी जाएगी, और रेल रोको आंदोलन किया जाएगा।

