भारत की आर्थिक सेहत का ब्लूप्रिंट माने जाने वाला इकोनॉमिक सर्वे 2026 आज संसद में पेश कर दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, भारत पूरे वित्त वर्ष के लिए 7 प्रतिशत से अधिक की वास्तविक आर्थिक वृद्धि की उम्मीद कर रहा है, और अगले वर्ष भी विकास दर इसी आसपास रहने का अनुमान है। सर्वे में बताया गया कि साल 2025 में वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही। पहली तिमाही में तेज़ी के साथ शुरू हुई आर्थिक रफ्तार ने पूरे साल स्थिरता दिखाई। केंद्रीय बैंक ने आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने के लिए ब्याज दरों में कटौती की और बाजार में तरलता सुनिश्चित की। सरकार ने बजट 2026 में कर

राहत और राजकोषीय अनुशासन के साथ घरेलू मांग को प्रोत्साहित किया। राजकोषीय घाटा FY25 में GDP का 4.8 प्रतिशत रहा, जबकि FY26 में इसे घटाकर 4.4 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया। वैश्विक स्तर पर भी भारत की अर्थव्यवस्था को तीन बड़ी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से अपग्रेड मिला, जिससे देश की साख और मजबूती का संदेश गया। हालांकि, सर्वे में यह भी चेतावनी दी गई कि रुपये का अवमूल्यन भारत की मजबूत आर्थिक बुनियादी ताकत के अनुरूप नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश को आकर्षित करने के लिए सतत प्रयास जरूरी हैं, ताकि पूंजी का प्रवाह सुचारू बना रहे।

