
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में ग्रंथ कुटीर का उद्घाटन किया। यह केंद्र भारतीय भाषाओं और साहित्य का समृद्ध खजाना है। ग्रंथ कुटीर में भारत की 11 शास्त्रीय भाषाओं में दुर्लभ पांडुलिपियाँ और पुस्तकें संग्रहित हैं। इसका उद्देश्य इन कीमती साहित्यिक धरोहरों को संरक्षित करना और विद्वानों, शोधकर्ताओं तथा आम जनता के लिए उपलब्ध कराना है। यहां आने वाले लोग भारतीय संस्कृति और साहित्य की विविधता को करीब से समझ सकते हैं। यह पहल भाषा और साहित्य के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत को भविष्य के लिए सुरक्षित रखेगी।

