वृंदावन में प्रेमानंद महाराज और प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय के बीच हुई वार्ता में ठाकुर जी के विवाह से जुड़ी परंपराओं और रस्मों का वर्णन किया गया। इस दौरान प्रेमानंद महाराज ने भक्ति मार्ग में अपनापन और

प्रेम की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि भक्ति में नियमों से अधिक भाव और प्रेम महत्वपूर्ण होता है।

