समाज में दहेज-प्रथा जैसी कुरीति के खिलाफ सशक्त संदेश देते हुए सर्वधर्म सामूहिक विवाह समिति द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह का 12वां संस्करण रविवार को भव्य और ऐतिहासिक रूप से सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। गोल्फ ग्राउंड में आयोजित इस आयोजन में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए और दहेज-मुक्त विवाह की इस सामाजिक पहल के साक्षी बने। इस वर्ष समारोह में कुल 73 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया, जिनमें 68 हिंदू, 3 ईसाई और 2 मुस्लिम जोड़े शामिल थे। समिति ने इस बार 101 जोड़ों के विवाह का लक्ष्य रखा था, लेकिन आयु-सीमा से जुड़े नियमों के कारण कई जोड़ों को इस वर्ष शामिल नहीं किया जा सका। इसके बावजूद आयोजन का उत्साह और प्रभाव बना रहा। गोल्फ ग्राउंड का दृश्य किसी बड़े मेले से कम नहीं था। चारों ओर उत्साह, उल्लास और सामाजिक समरसता का अद्भुत माहौल देखने को मिला। इस पुनीत कार्य में धनबाद जिले की 40 से अधिक सामाजिक संस्थाओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई, जिससे आयोजन और भी भव्य बन सका।

कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि हिंदू, मुस्लिम और ईसाई तीनों धर्मों के जोड़ों का विवाह उनके-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार संपन्न कराया गया। यह आयोजन सर्वधर्म समभाव और सामाजिक सौहार्द का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया। समिति के अध्यक्ष प्रदीप सिंह ने बताया कि दहेज-मुक्त विवाह के उद्देश्य से इस समारोह की शुरुआत 12 वर्ष पूर्व की गई थी। उन्होंने कहा कि यह पहल एक छोटे प्रयास के रूप में शुरू हुई थी, जो आज एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है और भविष्य में भी यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। वहीं युवा संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय संयोजक दिलीप सिंह ने कहा कि 12 वर्ष पहले रखी गई इस परंपरा को समाज और युवाओं का निरंतर सहयोग मिलता रहा है। प्रदीप सिंह के नेतृत्व में अनेक सामाजिक संगठनों की सहभागिता से यह आयोजन हर वर्ष और सशक्त होता जा रहा है। समारोह की शुरुआत सुबह 11 बजे हुई, जब टोटो पर सवार दूल्हों की भव्य बारात गाजे-बाजे और आतिशबाजी के साथ निकाली गई। बारात देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े और पूरा माहौल उत्सवमय हो गया। कुल मिलाकर, यह सामूहिक विवाह समारोह न केवल एक वैवाहिक आयोजन रहा, बल्कि दहेज-मुक्त समाज, सामाजिक एकता और सर्वधर्म सद्भाव का एक सशक्त और प्रेरणादायी संदेश बनकर उभरा।

