मनरेगा योजना का नाम बदलने के विरोध में कांग्रेस की ओर से एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम का आयोजन गांधी चौक पर किया गया।आयोजित कार्यक्रम में प्रखंड अध्यक्ष मंसारुल हक ने कहा कि मनरेगा से ग्रामीणों को काम मांगने का कानूनी अधिकार दिया गया था। 100 दिन के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित और विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत कर महिलाओं और भूमिहीनों को सशक्त बनाया गया था।इस अधिनियम से महात्मा गांधी का नाम हटाना एक साजिश और षड्यंत्र है। महात्मा गांधी श्रम की गरिमा, सामाजिक न्याय और गरीबों के प्रति नैतिक जिम्मेदारी के प्रतीक रहे हैं। मनरेगा का नाम परिवर्तन की प्रक्रिया महात्मा गांधी के मूल्यों के प्रति

भाजपा और आरएसएस की असहजता और अविश्वास को दर्शाता है। लेकिन दुर्भाग्य से देश मे पिछले कई वर्षों से यही हो रहा है।उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को केवल नया नाम देकर मोदी सरकार ने अपनी ब्रांडिंग की है, जबकि योजनाओं की मूल सोच, ढांचा और लाभार्थी वही रहे।

