यह कहानी है ठग को ठगने वाले एक आम आदमी की। यूपी पुलिस की यह शॉर्ट फिल्म डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से लोगों को सावधान करती है। नाना पाटेकर इसमें एक रिटायर्ड रेलवे गार्ड बने हैं। एक साइबर ठग खुद को मुंबई पुलिस का इंस्पेक्टर बताकर उन्हें एफआईआर का डर दिखाता है और 15 लाख रुपये मांगता है। लेकिन नाना की समझदारी से खेल पलट जाता है। यह कहानी

कानपुर के भूपेंद्र सिंह से प्रेरित है, जिन्होंने ठग की चाल समझकर उल्टा उससे पैसे मंगवा लिए। फिल्म बताती है—डरिए मत, समझदारी से काम लीजिए और साइबर ठगी से बचिए।

