पेसा दिवस: विकास योजनाओं और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन पर चर्चा |

पेसा दिवस: विकास योजनाओं और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन पर चर्चा |

पेसा दिवस के अवसर पर जिले के 113 पेसा ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम स्वशासन को सुदृढ़ करने,आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों को व्यवहार में स्थापित करने तथा लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की भावना को जन जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से पेसा दिवस के अवसर पर जिले के सभी 113 पेसा अधिसूचित ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। यह आयोजन जिले में पेसा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी पहल के रूप में उभरकर सामने आया।विशेष ग्राम सभाओं का मूल उद्देश्य पंचायत अधिनियम, 1996 की आत्मा एवं प्रावधान के अनुरूप ग्राम सभा को निर्णय की सर्वोच्च इकाई के रूप में सशक्त बनाना तथा ग्रामवासियों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना रहा।ग्राम सभा के दौरान ग्रामीणों को अवगत कराया गया कि पेसा अधिनियम के अंतर्गत ग्राम सभा विकास योजनाओं की योजना,चयन एवं क्रियान्वयन में निर्णायक भूमिका निभाती है।

जल,जंगल,जमीन एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण व प्रबंधन की प्रमुख इकाई है। लघु वनोपज पर सामुदायिक अधिकार सुनिश्चित करती है।सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक व्यवस्थाओं की रक्षा करती है।सामाजिक न्याय, पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बढ़ावा देती है।विशेष ग्राम सभाओं में ग्रामवासी की सक्रिय भागीदारी के साथ अनेक जन कल्याणकारी एवं सामाजिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें प्रमुख रूप से नशा मुक्ति एवं सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यालयों में उपस्थिति एवं बाल संरक्षण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और स्वास्थ सुविधाओं तक पहुँच।आजीविका के साधन,रोजगार सृजन, महिला स्व सहायता समूहों की भूमिका। जल स्रोतों का संरक्षण, वनों का संवर्धन एवं भूमि अधिकार। सरकारी योजनाओं की ग्राम स्तर पर निगरानी एवं सामाजिक अंकेक्षण रहे।इन ग्राम सभाओं में पंचायत प्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों, पारंपरिक नेतृत्व, महिला एवं युवा समूहों, स्वयं सहायता समूहों तथा विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों की सहभागिता उल्लेखनीय रही। महिलाओं एवं युवाओं की बढ़ती भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि ग्राम सभा केवल चर्चा का मंच नहीं, बल्कि सामूहिक नेतृत्व और सहभागिता का सशक्त माध्यम बन रही है।

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