राजधानी देहरादून में शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक ऐतिहासिक पहल सामने आई है। झाझरा स्थित प्रदेश के पहले जनजातीय विद्यालय वनवासी गुरुकुल दून संस्कृति स्कूल ने अपने पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव करते हुए श्रीमद्भगवद गीता को दैनिक और अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि उनका उद्देश्य अब विद्यार्थियों को सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं,

बल्कि जीवन-दृष्टि, चरित्र निर्माण और मूल्यबोध भी सिखाना है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और अध्यात्म की ओर नई दृष्टि से देख रही है l विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि गीता के शिक्षण से छात्रों के मानसिक, आध्यात्मिक और नैतिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

