
ट्रंप प्रशासन ने बुधवार को उच्च कुशल विदेशी कर्मचारियों को दिए जाने वाले H-1B वीजा के नियमों को और कड़ा करने की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक आंतरिक ज्ञापन में कहा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की ‘सेंसरशिप’ में शामिल पाए गए किसी भी व्यक्ति के वीजा आवेदन को अस्वीकृति के लिए चिह्नित किया जाना चाहिए। नई नीति का सीधा असर भारत और चीन जैसे देशों के हजारों तकनीकी पेशेवरों पर पड़ने की आशंका है, जो हर साल अमेरिकी कंपनियों में काम करने के लिए H-1B वीजा के लिए आवेदन करते हैं। H-1B वीजा अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि वे विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में बड़ी संख्या में विदेशी प्रतिभाओं की भर्ती करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नए दिशानिर्देशों से वीजा प्रक्रिया अधिक जटिल हो सकती है और आवेदन अस्वीकृति की संभावना भी बढ़ सकती है।

