धनबाद में कोयला चोरी के बड़े और गंभीर खुलासे ने सनसनी फैला दी है। बाबूलाल मरांडी के अनुसार, जिले में अवैध कोयला कारोबार अब केवल माफिया तक सीमित नहीं है। वर्तमान प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने माफिया को हटाकर खुद इस कारोबार में हिस्सेदारी ले ली है। धनबाद एसएसपी, डीएसपी, डीसी और अन्य अधिकारियों के संरक्षण में शहर की खदानें और साइट्स चल रही हैं। तीन बड़े केंद्र—बाघमारा, निरसा और झरिया—अवसरवादी थानों और 40 अवैध साइट्स से रोजाना 10,000 टन कोयला बंगाल और लोकल मंडियों में पहुंचता है।

प्रत्येक साइट पर गुर्गों को ‘कोड वर्ड्स’ दिए गए हैं। उदाहरण के लिए, भौरा साइट पर ‘अरविंद’ और ‘करण’ एसएसपी प्रभात कुमार के आदमी हैं। वहीं बरोरा, तेदुलमारी, जमुनिया और रामकनाली जैसी बड़ी साइट्स सीधे डीएसपी पुरुषोत्तम सिंह द्वारा संचालित हैं। पूरे सिंडिकेट का संचालन पदानुक्रम में होता है, जिसमें SSP ‘प्रधान सेनापति’ और DC ‘महामंत्री’ हैं। वसूली का सिस्टम पूरी तरह केंद्रीकृत है, और थानेदार, सीओ और माइनिंग ऑफिसर तक हिस्सेदारी पाते हैं। खदानों में बरसात के दौरान कई मजदूरों की मौतें हुईं, लेकिन प्रशासन ने पैसे और पावर के दम पर मामलों को दबाया। यह खुलासा धनबाद के अवैध कोयला व्यापार और उसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की गंभीर जांच की आवश्यकता को उजागर करता है।

