अटलांटिक महासागर की प्रमुख समुद्री धारा के कमजोर होने से यूरोप के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। यह धारा यूरोप को गर्म रखने में अहम भूमिका निभाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके रुकने से यूरोप में हिमयुग जैसी स्थिति आ सकती है, जबकि अफ्रीका, भारत और दक्षिण अमेरिका में बारिश का पैटर्न बिगड़ सकता है, जिससे खेती पर बड़ा असर पड़ेगा। आइसलैंड ने इस स्थिति को

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित किया है। देश के जलवायु मंत्री ने कहा कि यह आइसलैंड के अस्तित्व के लिए संकट है और सरकार सबसे बुरे हालात से निपटने की तैयारी कर रही है। उत्तरी ध्रुव के पास स्थित होने के कारण आइसलैंड पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है।

