
ब्रिक्स देशों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर जी7 की पकड़ पर दिखाई दे रहा है। भारत, रूस और चीन की गहरी होती दोस्ती ने पश्चिमी देशों की चिंता और बढ़ा दी है। वैश्विक व्यापार से लेकर सुरक्षा परिषद तक, ब्रिक्स की एकजुटता नई शक्ति समीकरण गढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां जी7 अब भी पारंपरिक ताकत के भरोसे खड़ा है, वहीं ब्रिक्स अपनी सदस्यता बढ़ाकर और दक्षिणी देशों को जोड़कर एक बड़ा आर्थिक और राजनीतिक मोर्चा बना रहा है। रूस और चीन पहले से पश्चिमी दबाव झेल रहे हैं, वहीं भारत का संतुलित लेकिन प्रभावशाली रुख इस धुरी को और मज़बूत बना रहा है। पश्चिमी मीडिया में भी यह चर्चा तेज है कि अगर यही रफ्तार रही तो आने वाले समय में जी7 की तुलना में ब्रिक्स को वैश्विक मामलों में ज्यादा अहमियत मिल सकती है। यही वजह है कि अमेरिका और यूरोपीय देश इस नए समीकरण से स्पष्ट रूप से असहज दिख रहे हैं।

