
कभी बच्चा भगवान का तोहफा माना जाता था, लेकिन अब टेक्नोलॉजी ने बच्चों को भी ‘डिजाइनर प्रॉडक्ट’ बना दिया है। अमेरिका की सिलिकॉन वैली में डिजाइनर बेबी का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। रिसर्चर बेनम हाइम्स ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसमें एम्ब्रियो का आईक्यू टेस्ट किया जाता है। यानी बच्चा जन्म लेने से पहले ही उसके दिमाग की क्षमता और भविष्य में होने वाली बीमारियों का अंदाजा लगाया जा सकता है। यही वजह है कि पैरेंट्स लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने को तैयार हैं, ताकि उनका बच्चा जीनियस और पूरी तरह स्वस्थ पैदा हो। वहीं योगगुरु स्वामी रामदेव का मानना है कि बच्चे को जीनियस बनाने और बीमारियों से बचाने के लिए आयुर्वेद और योग सबसे कारगर उपाय हैं। वे बताते हैं कि बादाम, अखरोट, ब्राह्मी, शंखपुष्पी और तुलसी जैसे घरेलू नुस्खे बच्चों की मेमोरी, इम्यूनिटी और ग्रोथ को बढ़ा सकते हैं। टेक्नोलॉजी और पारंपरिक नुस्खों के बीच बहस जारी है, लेकिन लक्ष्य एक ही है—स्वस्थ और होशियार पीढ़ी।
