भाजपा जिलाध्यक्ष की अध्यक्षता में विभाजन विभीषिका दिवस पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में गोड्डा के पूर्व विधायक अमित मंडल बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक अमित मंडल ने कहा कि भारत से शताब्दियों से जकड़ी हुई परतंत्रता की बेड़ियां 1947 में एक लंबे स्वतंत्रता संग्राम के बाद टूट गईं । देश की आशाओं व आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में बढ़ चला, लेकिन देश को स्वतंत्रता के साथ ही साथ विभाजन की विभीषिका भी झेलनी पड़ी। मुस्लिम लीग की मुसलमानों के लिए अलग देश की मांग ने लाखों लोगों को विस्थापित कर दिया, यह विस्थापन कोई सामान्य नहीं था।हजारों लोगों का जनसंहार हुआ, महिलाओं के साथ जघन्यतम अपराध हुए। उस दौर में भारतीय उपमहाद्वीप में मानवता त्राहिमाम कर उठी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के विरुद्ध देश एकजुट होकर लड़ा था, उस दौर में किसी ने इस तरह के विभाजन के बारे में सोचा भी नहीं होगा लेकिन अंग्रेजों की शातिराना कोशिशों तथा मुस्लिम लीग के सांप्रदायिक एजेंडे ने आधुनिक काल में मनुष्यता पर विभाजन द्वारा बड़ा संकट खड़ा किया। सन् 1905 में बंगाल के धर्म आधारित विभाजन के बाद से ही विभाजन की कुत्सित रूपरेखा बनना शुरू हो गई थी, विभिन्न इतिहासकारों ने अंग्रेजों के इस कदम को भारत विभाजन के बीज के रूप में देखा है। वहीं विभाजन के जिम्मेदारों पर बात करते हुए

समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया ने अपनी किताब गिल्टी मेन ऑफ़ पार्टिशन में लिखा कि कई बड़े कांग्रेसी नेता जिनमें नेहरू भी शामिल थे वे सत्ता के भूखे थे जिनकी वजह से बँटवारा हुआ। विभाजन की विभीषिका ने जिन लोगों को असमय मृत्यु की ओर ढकेल दिया, जिन परिवारों के साथ अमानवीय ज्यादतियां हुईं क्या देश को वर्तमान आधुनिक लोकतांत्रिक देश बनाने तथा स्वतंत्रता दिलाने में उनका योगदान था? यदि हां, तो उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए। बीते वर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 अगस्त के दिन को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की।कार्यक्रम में पूर्व जिलाध्यक्ष विवेकानंद तिवारी, जिला महामंत्री सरिता मुर्मू, रूपेश भगत, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष शबरी पाल,जिला उपाध्यक्ष धर्मेंद्र त्रिवेदी, दादपुर मंडल अध्यक्ष सुशांत घोष, गांधाईपुर मंडल अध्यक्ष मनोरंजन सरकार, हिरणपुर मंडल अध्यक्ष सुकुमार मंडल,नगर अध्यक्ष सोहन मंडल, युवा मोर्चा नगर अध्यक्ष रतन भगत, सपन दुबे,जीतू सिंह, प्राची चौधरी, पवन भगत, चमरू रजवार सहित कई कार्यकर्त्ता शामिल हुए।

