पाकुड़-राजग्राम मुख्य सड़क अपने वजूद से ही जर्जर बना हुआ है। इस मामले में ग्रामीणों ने उपायुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि उक्त सड़क पत्थर कारोबारियों के कारण धवस्त हुआ है। बहिराग्राम से चेंगाडांगा तक की सड़कों पर बड़े बड़े गड्ढे हो गए है। हालात इतनी बुरी है कि पाकुड़ से जाने वाली स्कूल बसों को ले जाने के लिए मना कर दिया है। चेंगाडांगा व नसीपुर के ग्रामीणों ने उपायुक्त पाकुड़ से सड़क मरम्मती हेतु पत्राचार किया है। गौरतलब हो कि गड्ढेनुमा सड़क के अगल बगल दर्जनों स्टोन क्रेशर है और प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक और रेक से वहां का स्टोन चिप्स दूसरे राज्य ही नहीं बल्कि बांग्लादेश भी भेजा जाता है। पत्र में लिखा गया है कि खुल्लम खुला इस क्षेत्र में बिना माइनिंग चालान के पत्थर बाहर भेजा जा रहा है लेकिन आसपास के गांव के लोगों का हित के लिए सड़क मरम्मती नहीं किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो इन सड़कों की

मरम्मती हेतु कथित तौर पर रोजाना गाड़ियों से पैसे भी वसूली की जाती है। इस बाबत पूछने पर स्थानीय लोगों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि वैसे तो सड़क मरम्मति व ग्रामीणों के सहयोग के नाम पर पैसे वसूले जाते हैं लेकिन इन पैसों की तीन हिस्सों में बंदरबाट होती है। इस मामले में एक सेवानिवृत्त पंचायत सचिव ने कहा कि इसके पीछे रसूखदारों की टीम काम करती है और यह उगाही कई वर्षों से चल रही है। सवाल यह उठता है कि सड़क मरम्मति हेतु जब संबंधित विभाग है तो फिर ऐसी वसूली क्योंकर की जा रही है ? खैर ग्रामीणों की नजर अब प्रशासनिक आदेश पर टिकी हुई है।

