
जम्मू-कश्मीर सरकार ने आतंकियों और अलगाववादियों के पारिस्थितिक तंत्र को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 25 पुस्तकों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें ए.जी. नूरानी की The Kashmir Dispute 1947-2002, अरुंधति रॉय की आजादी और अनुराधा भसीन की A Dismantled State जैसी चर्चित किताबें शामिल हैं। गृह विभाग के मुताबिक, ये पुस्तकें भारत की संप्रभुता को चुनौती देती हैं, झूठे नैरेटिव के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाती हैं, और आतंकवाद का महिमामंडन करती हैं। सरकार ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं के तहत इन पुस्तकों को “ज़ब्त साहित्य” घोषित किया है। अब न तो इनका प्रचार-प्रसार किया जा सकता है, न ही बिक्री — उल्लंघन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। ये फैसला एक विस्तृत जांच के बाद लिया गया, जिसमें पाया गया कि ये पुस्तकें झूठे ऐतिहासिक तथ्य, सुरक्षाबलों का अपमान, और जिहादी मानसिकता को बढ़ावा देती हैं।

