पाकिस्तान की लोक गायिका शाम बाई अपने गीतों से जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दे पर नई चेतना जगा रही हैं। सिंध प्रांत की रहने वाली शाम बाई ने पिछले दो वर्षों में सैकड़ों गांवों का दौरा किया और सिंधी भाषा में लोकगीतों के जरिए ग्रामीणों को पर्यावरणीय खतरों से सचेत किया। 2022 में सिंध भीषण बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था, जहां हजार से अधिक लोगों की जान गई और लाखों विस्थापित हुए। इंटरनेट और साक्षरता की कमी वाले इन इलाकों में शाम बाई का संगीत सशक्त जन-जागरूकता

माध्यम बन गया है। उनका मानना है — “गीतों से बात सीधे दिल तक जाती है।” केवल शाम ही नहीं, कई पाकिस्तानी कलाकार अब रैप म्यूज़िक से भी इस मुहिम में शामिल हो रहे हैं। जब सरकारें नाकाम नजर आती हैं, कलाकारों की आवाज़ें बदलाव की नींव रखती हैं — और शाम बाई इसका सजीव उदाहरण हैं।

