देवघर के देवीपुर में स्थित एम्स के पहले दीक्षांत समारोह में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुई। कार्यक्रम में 48 छात्रों को सम्मानित किया गया लेकिन सांकेतिक रूप से राष्ट्रपति के द्वारा पांच छात्रों के बीच मेडल और डिग्री बांटी गई।उसके बाद कार्यक्रम में मौजूद विशिष्ट अतिथिगण छात्रों के बीच डिग्री का वितरण करेंगे। राष्ट्रपति ने डॉ अमित अग्रवाल को गोल्ड मेडल दिया, डॉ कनिष्क कुमार को रजत से सम्मानित किया और हरमीत कौर को कांस्य पदक से सम्मानित किया। इसके अलावा एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में सबसे बेहतर उपस्थिति दर्ज करने वाली डॉक्टर रिचा अग्रवाल को राष्ट्रपति ने डिग्री देकर सम्मानित किया।वही डॉ अंजनी कुमारी, डॉ गौतम शंकर आठ,डॉक्टर सुमिता सिंहा,डॉक्टर शिक्षा सिंह डॉक्टर ॐ शंकर के बीच एमबीबीएस की डिग्री देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में मौजूद राज्य के राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि यह मौका वाकई में बेहद खास है।राज्यपाल ने कार्यक्रम में आए छात्रों को संबोधित करते हुए कहा जब से वो राज्य के राजपाल बने हैं।उन्होंने यह अनुभव किया है कि आज भी उच्च शिक्षा को लेकर झारखंड में कई कमियां है। उन्होंने दीक्षांत समारोह में पहुंचे छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज से सिर्फ उनके डॉक्टरी पेशे की शुरुआत नहीं हो रही है बल्कि एक सामाजिक दायित्व को निभाने का समय भी शुरू हो रहा है।चिकित्सा का क्षेत्र करियर का मार्ग नहीं बल्कि यह उन लोगों को एक दूसरे से जोड़ता है जो

सबसे अचेत स्थिति में डॉक्टरों के पास उम्मीद लेकर आते हैं।जब वह ठीक हो जाते हैं तो उनके लिए डॉक्टर एक इंसान नहीं बल्कि भगवान की तरह होता है।इसलिए इस पेशे का सम्मान हमेशा हो इसका सभी छात्र ख्याल रखें। वही कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश के राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कहा कि देवघर एम्स से उनका एक विशेष लगाव हैं। वर्ष 2018 में जब प्रधानमंत्री ने इस संस्था की नींव रखी थी तो वह उसे वक्त झारखंड के राज्यपाल थी। आज जब एमबीबीएस की पहली बच निकली है तो वह फिर से इस अस्पताल और मेडिकल कॉलेज पहुंची हुई है। Bureau report newz India 24 उन्होंने डिग्री लेने आए छात्रों से कहा कि एम्स एक ऐसा संस्थान है जो यह गारंटी देता है कि इसमें पढ़ाई करने के बाद प्रत्येक छात्र कुशल और सक्षम डॉक्टर बन चुका है। लेकिन एक अच्छे डॉक्टर हम तभी बन सकते हैं जब एक अच्छे इंसान बने। राष्ट्रपति ने डिग्री लेने आए छात्रों से अच्छे इंसान बनने की भी अपील की। उन्होंने इस बात की भी खुशी जताया कि आज देवघर एम्स में लड़की छात्रों की संख्या अत्यधिक है जो यह बताता है कि आज हमारा देश लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने एम्स की उपलब्धियां को छात्रों के बीच में गिनाया और छात्रों से कहा कि जब कोई व्यक्ति अचेत अवस्था में अस्पताल पहुंचता है तो उसके लिए डॉक्टर ही भगवान होते हैं। यदि डॉक्टर की सलाह पर वह ठीक होने लगते हैं तो डॉक्टर की सलाह उनके लिए भगवान का वाक्य जैसा बन जाता है। उन्होंने डिग्री लेने आए विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि एम्स को रोल मॉडल बनाने में अपना अहम भूमिका निभाई और लाचार एवं बीमार मरीजों की सेवा करने का काम निरंतर बनाए रखें। कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के साथ राज्य के राज्यपाल संतोष गंगवार,भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव निवेदिता शुक्ला, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी,एम्स के सीईओ एन के अरोरा,एम्स के निदेशक डॉ सौरभ वार्ष्णेय सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।

