ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक संस्थाओं की निष्क्रियता और असमान प्रतिनिधित्व पर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि “विश्व की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाले कई देशों को निर्णय प्रक्रिया में जगह नहीं मिलती, यह केवल प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि विश्वसनीयता और प्रभावशीलता का सवाल है।” पीएम मोदी ने पुराने ढांचे की आलोचना करते हुए कहा, “आप 20वीं सदी के टाइपराइटर पर 21वीं सदी का सॉफ्टवेयर नहीं चला सकते।” उन्होंने जलवायु वित्त, सतत विकास और

प्रौद्योगिकी जैसे मुद्दों पर ग्लोबल साउथ को केवल सांकेतिक समर्थन मिलने की बात कही। पीएम मोदी ने मौजूदा वैश्विक संकटों — संघर्ष, महामारी, आर्थिक अस्थिरता, साइबर और अंतरिक्ष चुनौतियों — में संस्थाओं की विफलता को रेखांकित किया। अंत में उन्होंने कहा कि “दुनिया को नई, बहुध्रुवीय और समावेशी व्यवस्था की जरूरत है और इसकी शुरुआत वैश्विक संस्थाओं में सुधार से होनी चाहिए। आतंकवादियों पर प्रतिबंध में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए।”

