लोयाबाद (सिजुआ)। बीसीसीएल (B.C.C.L.) सिजुआ क्षेत्र में स्थित क्षेत्रीय अस्पताल की हालत जर्जर हो चुकी है। वर्षों से इस अस्पताल से क्षेत्र के हज़ारों लोगों को चिकित्सकीय सेवा मिलती रही है, लेकिन अब यह अस्पताल खुद बीमार अवस्था में पहुंच गया है। सबसे खतरनाक स्थिति मुख्य द्वार के पोर्टिको की है, जिसकी छत कभी भी गिर सकती है। इसके बावजूद हर दिन सौ से अधिक मरीज इसी रास्ते से अंदर जाते हैं, और डॉक्टरों व स्टाफ का भी यही प्रमुख मार्ग है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में समय-समय पर मरम्मत तो कराई जाती है, लेकिन उनमें भारी अनियमितता और घटिया निर्माण सामग्री के कारण कुछ ही दिनों में फिर से दीवारों में दरारें, छत में रिसाव और ढांचागत खामियां सामने आ जाती हैं।

अंधेरे में इलाज, जनरेटर की सुविधा नहीं अस्पताल में जनरेटर जैसी मूलभूत सुविधा तक मौजूद नहीं है। बिजली गुल होते ही पूरा अस्पताल अंधेरे में डूब जाता है, और डॉक्टरों को मजबूरी में मोबाइल की टॉर्च या मोमबत्ती की रोशनी में इलाज करना पड़ता है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब किसी घायल मजदूर या मरीज को आपातकालीन स्थिति में लाया जाता है। अंधेरे में इलाज न केवल चुनौतीपूर्ण होता है, बल्कि मरीज की जान को भी खतरे में डाल देता है। प्रबंधन पर उठ रहे सवाल स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बीसीसीएल और अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही के चलते यह प्रतिष्ठित चिकित्सकीय केंद्र अब बर्बादी की कगार पर पहुंच गया है। वर्षों से शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन न तो भवन की स्थिति सुधरी है और न ही बुनियादी सुविधाओं में कोई सुधार हुआ है। लोगों की मांग है कि अस्पताल की जल्द से जल्द उच्चस्तरीय मरम्मत कराई जाए और जनरेटर जैसी आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं, ताकि मरीजों की जान को और खतरे में न डाला जाए।

