
मुंबई में स्कूलों में तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी को अनिवार्य बनाने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ महा विकास अघाड़ी (MVA) के नेताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राज्य सरकार क्षेत्रीय भाषाओं की उपेक्षा कर रही है और मराठी भाषा व संस्कृति के साथ अन्याय किया जा रहा है। MVA नेताओं ने कहा कि भाषा थोपने का कोई अधिकार सरकार को नहीं है और यह फैसला संविधान की भावना के खिलाफ है। कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और नारेबाज़ी की। प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर हल्की धक्का-मुक्की भी देखी गई, हालांकि स्थिति जल्द ही नियंत्रित कर ली गई। विपक्ष ने राज्य सरकार से यह फैसला तुरंत वापस लेने की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर भाषा थोपने की कोशिश की गई तो यह आंदोलन और तेज़ होगा।

