आयुष्मान घोटाला मामले में ED का बड़ा एक्शन, पूर्व मंत्री के करीबी के ठिकानों पर मारा छापा आयुष्मान भारत योजना में हुए कथित घोटाले की जांच में ED ने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के निजी सचिव ओमप्रकाश गुप्ता के ठिकानों पर छापामारी की। ईडी की यह कार्रवाई केवल झारखंड तक सीमित नहीं रही। देशभर में कुल 21 स्थानों पर छापामारी की गई जिसमें झारखंड के 17 स्थानों दो पश्चिम बंगाल एक दिल्ली में और उत्तर प्रदेश में एक जगह पर छापामारी की गई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड में आयुष्मान भारत योजना में हुए कथित घोटाले के संदर्भ में शुक्रवार को व्यापक कार्रवाई की। इस अभियान में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के निजी सचिव ओमप्रकाश गुप्ता के जमशेदपुर स्थित आवास सहित देश के 21 स्थानों पर छापामारी की गई। इन लोगों पर हुआ एक्शन रांची, जमशेदपुर, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में फैले इस ऑपरेशन में ईडी ने थर्ड पार्टी असेसमेंट (टीपीए) एजेंसियों और अन्य संदिग्धों के ठिकानों को भी निशाना बनाया। यह कार्रवाई भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुई, जिसमें योजना में मृत व्यक्तियों के इलाज जैसे गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। जमशेदपुर में ओमप्रकाश के आवास पर दबिश ईडी की टीम ने सुबह-सुबह जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र में स्थित नीलगिरी अपार्टमेंट में ओमप्रकाश गुप्ता के आवास पर छापा मारा। ओमप्रकाश, जो बन्ना गुप्ता के निजी सचिव (ओएसडी) रह चुके हैं, इस घोटाले में अहम कड़ी माने जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, एनएच-33 पर स्थित स्पंदन नर्सिंग होम में भी ईडी ने तलाशी अभियान चलाया। सूत्रों के अनुसार, ओमप्रकाश पर योजना के तहत फर्जी दावों और धन के दुरुपयोग में संलिप्तता का संदेह है। छापामारी के दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। रांची में भी गरजी ईडी की टीम राजधानी रांची में भी ईडी ने कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। बरियातू थाना क्षेत्र के अरविंद मार्ग पर रश्मि एनक्लेव और रामेश्वरम लेन के श्यामा एनक्लेव में सुजीत यादव के आवास पर छापा पड़ा। इसके अलावा, अशोक नगर, पीपी कंपाउंड, एडलहातु, लालपुर और चिरौंडी जैसे इलाकों में भी तलाशी अभियान चलाया गया। इन स्थानों पर टीपीए एजेंसियों और अन्य संदिग्धों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

ईडी का मानना है कि इन ठिकानों से घोटाले से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकते हैं। सीएजी रिपोर्ट ने खोली पोल इस कार्रवाई की नींव तब पड़ी, जब सीएजी ने संसद में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में आयुष्मान भारत योजना के तहत झारखंड में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख था, जिसमें मृत व्यक्तियों के नाम पर इलाज दिखाकर धन की हेराफेरी और फर्जी दावों का खुलासा हुआ। इसके बाद ईडी ने स्वास्थ्य विभाग और झारखंड राज्य स्वास्थ्य सोसाइटी से अनियमितताओं में शामिल लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी। विभाग ने कुछ अस्पतालों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों (एफआईआर) का विवरण सौंपा, जिसके आधार पर ईडी ने प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की और जांच शुरू की। 21 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी ईडी की यह कार्रवाई केवल झारखंड तक सीमित नहीं रही। कुल 21 स्थानों पर छापेमारी में 17 झारखंड में, दो पश्चिम बंगाल में, एक दिल्ली में और एक उत्तर प्रदेश में शामिल हैं। यह व्यापक अभियान इस घोटाले के राष्ट्रीय स्तर पर फैले जाल की ओर इशारा करता है। सूत्रों के मुताबिक, योजना के तहत फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये की उगाही की गई, जिसमें अस्पतालों, टीपीए एजेंसियों और अधिकारियों की मिलीभगत संदिग्ध है। बन्ना गुप्ता पर बढ़ा संकट पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता इस मामले में सीधे तौर पर जांच के दायरे में नहीं आए हैं, लेकिन उनके निजी सचिव रह चुके ओमप्रकाश पर कार्रवाई ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। राजनीतिक गलियारों में इस छापामारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। विपक्षी दल इसे सरकार के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। ओमप्रकाश के ठिकानों से मिलने वाले साक्ष्य इस मामले में नया मोड़ ला सकते हैं। आयुष्मान घोटाला: कितना बड़ा है खेल? आयुष्मान भारत योजना गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन झारखंड में यह घोटाले का अड्डा बन गई। सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों के नाम पर इलाज, फर्जी दावे और बिना भर्ती के भुगतान जैसे मामले सामने आए हैं। ईडी अब इस काले कारनामे की परतें निकालने में जुटी है। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले में करोड़ों रुपये के हेरफेर की आशंका है, जिसके तार देश के कई हिस्सों से जुड़े हो सकते हैं।