
झारखंड में 12,000 से ज्यादा आदिवासी बेटियों के धर्मांतरण को लेकर हाल ही में कई मीडिया रिपोर्ट्स और चर्चाएं सामने आई हैं। यह मुद्दा राज्य में सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक विवादों का कारण बन गया है। आरोप है कि कुछ धर्म प्रचारक और मिशनरी संस्थाएं आदिवासी इलाकों में अपने धर्म का प्रचार करने के लिए आदिवासी समुदाय की महिलाओं और बेटियों को प्रभावित कर रही हैं। धर्मांतरण की इस प्रक्रिया को लेकर राज्य में कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों ने चिंता व्यक्त की है और इसे एक गंभीर समस्या के रूप में देखा जा रहा है। राज्य सरकार ने इस मामले में जांच करने की बात की है और कुछ स्थानों पर इसे रोकने के लिए कदम उठाए हैं। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि कुछ मामलों में आदिवासी समुदाय की महिलाएं अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन कर रही हैं, जबकि कुछ अन्य मामलों में यह आरोप लगाया जा रहा है कि धर्मांतरण को लेकर दबाव डाला जा रहा है। यह स्थिति समाज में विभिन्न दृष्टिकोणों को जन्म देती है, और इसे लेकर कई तरह की बहसें चल रही हैं। इस विषय पर सरकार, समाज और विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच संवाद और समाधान की आवश्यकता है ताकि सभी पक्षों के हितों का सम्मान किया जा सके और स्थिति को शांति से सुलझाया जा सके।