राज्य सरकार बजट खर्च करने में विफल, विधायक प्रदीप प्रसाद ने घेरा |

राज्य सरकार बजट खर्च करने में विफल, विधायक प्रदीप प्रसाद ने घेरा |

भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने राज्य सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन पर उठाए सवाल, बजट खर्च में लापरवाही को लेकर सरकार घिरी सरकार की लापरवाही से विकास कार्य ठप, जनता को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ :– प्रदीप प्रसाद झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भाजपा के सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने राज्य सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन और योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। वित्त विभाग द्वारा दिए गए जवाबों से स्पष्ट हुआ कि सरकार की वित्तीय नीतियां न केवल अव्यवस्थित हैं, बल्कि बजट का समुचित उपयोग भी नहीं किया जा रहा है। योजनाओं के लिए आवंटित बजट का बड़ा हिस्सा अब तक खर्च नहीं विधायक प्रदीप प्रसाद ने सरकार से पूछा कि क्या यह सही है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार ने योजनाओं के लिए 63.25% राशि ही खर्च की है, जबकि वर्ष समाप्त होने में मात्र 20 दिन शेष हैं? उन्होंने सवाल किया कि सरकार को शेष 37% राशि खर्च करने में क्या दिक्कत हो रही है और क्या इससे योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर नहीं पड़ेगा? सरकार द्वारा दिए गए जवाब में यह स्वीकार किया गया कि अब तक 69.94% बजट का ही उपयोग हुआ है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में महज 20.47%, आउटडोर खेल विभाग में 7.54%, परिवहन विभाग में 6.36%, नगर विकास विभाग में 33.84% और खाद्य आपूर्ति विभाग में 38.73% ही खर्च किया गया है। श्री प्रसाद ने कहा, “यदि महत्वपूर्ण विभागों में बजट का बड़ा हिस्सा अब तक खर्च नहीं हुआ है, तो इसका मतलब है कि राज्य सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित है। अगर विभागों की यह स्थिति है, तो आम जनता को इन योजनाओं का लाभ कैसे मिलेगा?” केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता का उपयोग नहीं कर पाई राज्य सरकार विधायक प्रदीप प्रसाद ने केंद्र सरकार द्वारा झारखंड को दी गई वित्तीय सहायता राशि पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने पूछा कि क्या यह सही है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में केंद्र सरकार द्वारा झारखंड को 5,255.14 करोड़ रुपये की विशेष सहायता दी गई थी, लेकिन अब तक 4,580.62 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं? सरकार के जवाब में इसे स्वीकार किया गया कि केंद्र द्वारा झारखंड को दीर्घकालिक ऋण के रूप में यह सहायता दी गई थी, लेकिन अब तक यह पूरी राशि उपयोग में नहीं लाई जा सकी है। श्री प्रसाद ने कहा कि जब केंद्र सरकार राज्य के विकास के लिए धन आवंटित कर रही है, तो राज्य सरकार आखिर इसे खर्च करने में असमर्थ क्यों है? क्या सरकार की नौकरशाही इतनी सुस्त है कि उसे जनता की जरूरतों की कोई परवाह नहीं? एक अन्य प्रश्न में विधायक प्रदीप प्रसाद ने केंद्र सरकार से प्राप्त वित्तीय सहायता से जुड़ी प्रक्रियागत देरी को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या यह सही है कि केंद्र सरकार प्रत्येक तीन महीने में राज्यों से उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगती है, लेकिन झारखंड सरकार इन प्रमाण पत्रों को समय पर प्रस्तुत नहीं कर पा रही, जिससे केंद्र से मिलने वाली राशि लंबित हो रही है? सरकार ने इस बात को स्वीकार किया और बताया कि अभी तक 81.47 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित है, जिसे 31 मार्च 2025 तक प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जारी है। श्री प्रसाद ने कहा सरकार की यह लापरवाही राज्य के विकास कार्यों पर सीधा असर डाल रही है। यदि समय पर प्रमाण पत्र नहीं भेजे जाते, तो झारखंड को भविष्य में मिलने वाली केंद्रीय सहायता पर भी संकट आ सकता है। सरकार को इस मुद्दे पर गंभीर होना चाहिए। विधायक प्रदीप प्रसाद ने पूछा कि यदि सरकार को यह ज्ञात है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बावजूद कई योजनाओं की राशि खर्च नहीं हो पाई है, तो क्या सरकार इसके लिए वित्तीय अनुशासन अपनाएगी और लंबित राशि के उपयोग के लिए कोई ठोस रणनीति बनाएगी? सरकार नेहै अपने जवाब में कहा कि मार्च के अंतिम महीने में सभी योजनाओं की समीक्षा की जा रही है और बचे हुए बजट को जरूरत के हिसाब से खर्च करने का प्रयास किया जा रहा है।

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