यह घटना हाल ही में हुई, जब जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई। इस आग के दौरान, पुलिस को वहां भारी मात्रा में नकदी मिली। हालांकि, जब यह घटना घटी, तब जस्टिस वर्मा अपने घर पर नहीं थे। वह शहर से बाहर थे। जब आग बुझाने के बाद पुलिस ने आवास का निरीक्षण किया, तो वहां एक पैसों का भंडार मिला। इसके बाद इस मामले की जानकारी सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम तक पहुंची, और फिर कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा के तबादले का फैसला लिया। सूत्रों के अनुसार, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, सीजेआई संजीव खन्ना ने तुरंत कॉलेजियम की बैठक बुलाई। बैठक में कुछ जजों ने कहा कि इस तरह की गंभीर घटना को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामले को हलके में लिया जाता है, तो इससे न्यायपालिका की

छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके बाद कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में वापस भेजने की सिफारिश की, ताकि इस घटना के बारे में और अधिक जांच की जा सके। यह घटनाक्रम न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि किसी भी भ्रष्टाचार या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की जांच जारी है, और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।