मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को एक बड़ी घोषणा की है। राज्य के चार ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किया गया है, जिनमें अशोक शिलालेख स्थल, चौंसठ योगिनी मंदिर, गुप्त काल के मंदिर और बुंदेलों के महल-किले शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर इसे राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए गर्व का पल बताया। इस समावेश के साथ, अब मध्य प्रदेश में कुल 18 यूनेस्को मान्यता प्राप्त विरासत स्थल हो गए हैं। इनमें से तीन स्थलों को स्थायी सूची में और 15 को संभावित सूची में स्थान मिला है। पिछले साल भी राज्य के छह अन्य स्थलों को यूनेस्को की संभावित सूची में जगह मिली थी। स्थायी सूची में शामिल स्थलों में खजुराहो मंदिर समूह, भीमबेटका रॉक शेल्टर और सांची के बौद्ध स्मारक शामिल हैं।

वहीं, संभावित सूची में मांडू, ओरछा, भेड़ाघाट-लमेटाघाट और चंदेरी जैसे स्थल हैं। यह सम्मान राज्य की विरासत को संरक्षित करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रति मध्य प्रदेश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने राज्य पर्यटन बोर्ड, संस्कृति विभाग, पुरातत्वविदों और स्थानीय नागरिकों को इस सफलता के लिए बधाई दी है। यह खबर मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। हम उम्मीद करते हैं कि राज्य की सांस्कृतिक धरोहर पूरी दुनिया में और भी ज्यादा प्रसिद्ध हो।