विद्या मंदिर में स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदर्शनी का आयोजन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर बाबू गांव कोर्रा में विद्यालय के स्थापना दिवस के अवसर पर विज्ञान, गणित एवं संगणक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉक्टर आर के कर्ण, विशिष्ट अतिथि डॉक्टर के के गुप्ता, विद्यालय के अध्यक्ष डॉ बृज कुमार विश्वकर्मा, सचिव राम बहादुर सिंह, प्रधानाचार्य मनोज कुमार, डॉ मंजू कुमारी, मालवीय मार्ग के प्रधानाचार्य संजीव झा, रामनगर के प्रधानाचार्य राजकुमार नाग ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्ज्लित कर किया। आगंतुक अतिथियों का परिचय एवं स्वागत विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोज कुमार सिंह ने कराया ।विद्यालय के आचार्य एवं आज के कार्यक्रम प्रमुख शिव शरण ठाकुर ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन सभी संस्थाओं में किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य भैया बहनों को विज्ञान के अवधारणाओं का ज्ञान कराना और समाज में इसका प्रचार -प्रसार करना है। उन्होंने आगे कहा कि भैया -बहन बहुत कम समय में इतना अधिक प्रदर्श बनाकर ले आए इससे यही मालूम पड़ता है कि इन्हें विज्ञान में विशेष रूचि है और वें ही कल के वैज्ञानिक हैं। कुल 55 प्रदर्श सभी विषयों को दिखाया गया। बच्चों के द्वारा बनाया गया प्रदर्श यह बतलाता है कि नन्हे मुन्ने बच्चों में समाज को देने के लिए कितना है। अपने संबोधन में डॉक्टर मंजू कुमारी ने कहा कि मैं हमेशा शिक्षा के क्षेत्र में जुड़ी रही हूं और विभिन्न विद्यालयों में बच्चों के साथ रहकर शिक्षा के प्रति बच्चों को जागरूक करती रही हूं। हमारे देश के वैज्ञानिक अभी पूरे विश्व में परचम लहरा रहे हैं। अमेरिका में एक करोड़ एवं पश्चिमी देशों में भी एक करोड़ हमारे देश के वैज्ञानिक कम कर रहे हैं। चंद्रयान, गगनयान एवं शुन्य भारत की ही देन है। भारत ही आयुर्वेद का जनक है। आज कंप्यूटर के बिना पूरे विश्व में कोई काम नहीं हो पता है।

आज जो कंप्यूटर नहीं जानता है उसे किसी भी चीज का ज्ञान नहीं है।व्यक्ति जीवन भर सीखता रहता है एवं नित्य नए ज्ञान प्राप्त करता रहता है। सचिव राम बहादुर सिंह अपने संभाषण में कहा कि बच्चों द्वारा बनाया गया प्रदर्श एक सराहनीय कार्य है, इससे यही पता चलता है कि बच्चों के अंदर कितनी प्रतिभाएं छिपी हुई हैं, उन्हें सिर्फ निखारने एवं मार्ग दिखाने की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि डॉक्टर के के गुप्ता ने अपने संभाषण में कहा कि जब भी विज्ञान की बात चलती है, तो विज्ञान यानी विशेष ज्ञान या विस्तार ज्ञान का पता चलता है, हर एक बच्चे में नैसर्गिक ज्ञान होता है ।ईश्वरीय शक्ति होती है, जिसे बाहर निकलने का कार्य आचार्य करते हैं ,जिन बच्चों में ज्ञान की भूख होती है वह रचनात्मक कार्य करते हैं। विज्ञान के सहारे दुनिया तरक्की कर रही है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य भैया बहनों का सर्वांगीण विकास करना है। सैद्धांतिक विकास और रचनात्मक विकास भैया बहनों में प्रयोग के माध्यम से ही हो सकता है ।उन्होंने आगे कहा कि आवश्यकता ही प्रदर्श की जननी है। प्रदर्श के माध्यम से बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा क्षमता, योग्यता ,अभिलाष और इच्छा को बाहर निकाला जा सकता है। जीवन में सफलता के लिए एक ही बार समय मिलता है जिसे हमें चुकना नहीं चाहिए और बिना गुरु का ज्ञान भी प्राप्त नहीं हो सकता इसीलिए आचार्य का दायित्व है कि वह भैया बहनों के अंदर छिपी प्रतिभा को निखारें ।जिस बच्चे में प्रबल शक्ति होती है, वही कुछ कर सकता है। बच्चों को प्रकृति से जुड़कर प्रदर्श बनानी चाहिए । मुख्य अतिथि डॉक्टर आर के कर्ण ने कहा कि विद्या मंदिर ही एक ऐसी संस्था है, जहां भैया बहनों को संस्कार दी जाती है। भैया बहनों को सैद्धांतिक शिक्षा तो सभी विद्यालयों में दी जाती है, लेकिन व्यावहारिक शिक्षा सिर्फ विद्या मंदिर में ही की जाती है। प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ कमियां रहती है लेकिन उसे समय के साथ-साथ दूर किया जा सकता है। प्रदर्श से के माध्यम से भैया बहनों का मानसिक एवं बौद्धिक विकास तो होता ही है साथ ही साथ उनमें एक्टिविटी भी बढ़ती है। मैकाले के समय विज्ञान का विकास लगभग रुक -सा गया था लेकिन तकनीक का विकास हमेशा होता रहा है।सामाजिक समस्याओं का समाधान प्रदर्श के माध्यम से ही किया जा सकता है ।उन्होंने डॉक्टर जगदीश चंद्र बोस द्वारा किए गए प्रयोग के माध्यम से