गाजियाबाद में शाहरुख नाम के विक्रेता की दुकान को बजरंग दल द्वारा बंद करवा दिया गया। शाहरुख मंदिर के बाहर प्रसाद बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। बजरंग दल का आरोप था कि वह मंदिर के बाहर प्रसाद बेचने के कारण धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन कर रहा था। हालांकि, यह घटना इस बात को उठाती है कि

ऐसे मामलों में सह-अस्तित्व और धार्मिक सद्भावना का महत्व क्या है। भारत में कई जगहों पर गैर-मुसलमानों को भी मज़ारों और दरगाहों के पास तबर्रुक और मिठाई बेचते देखा जाता है, जो कि सहअस्तित्व की परंपरा को दर्शाता है।