अमेरिका में एक पाकिस्तानी मूल के नागरिक मोहम्मद अल्तमस को पुलिस ने चाकू लेकर घूमते हुए पकड़ा। पुलिस ने उसे सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन जब उसने ऐसा नहीं किया, तो पुलिस ने उसे रोकने के लिए गोली चलाई। खास बात यह है कि पुलिस की गोलियां उसकी छाती और सिर पर लगीं। अब सवाल यह उठता है कि अगर यह घटना भारत में होती, तो कुछ लोग शायद पूछते, “क्यों सिर्फ एक गोली नहीं मारी गई?” या “पैर में गोली क्यों नहीं मारी गई?” और यही सवाल अक्सर तब उठता है

जब पुलिस कार्रवाई को लेकर आलोचनाएं होती हैं। भारत में ऐसी घटनाओं पर अक्सर बहस होती है कि पुलिस को क्या तरीका अपनाना चाहिए—क्या उन्हें गोली चलाने से पहले दूसरे विकल्पों को नहीं आजमाना चाहिए? क्या हमें किसी भी स्थिति में गोली चलाने की बजाय, अधिक संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता नहीं है? इस घटना से जुड़े सवाल हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि विभिन्न देशों में कानून-व्यवस्था लागू करने के तरीके अलग-अलग क्यों होते हैं और क्या हमें इन घटनाओं से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित देशों के कानून और प्रशासन की प्रक्रिया को समझने की जरूरत है।