यह घटना महाराष्ट्र में हुई एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक घटना है, जिसमें एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को तीसरी बेटी होने की वजह से जिंदा जला दिया। इस घटना से महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और हिंसा की गंभीर समस्या पर फिर से रोशनी डाली है। यह घटना न केवल समाज में महिलाओं के प्रति हिंसा को उजागर करती है, बल्कि यह यह भी दिखाती है कि कुछ लोगों में अभी भी इस प्रकार की सोच और मानसिकता मौजूद है,

जहां वे अपने परिवार की महिला सदस्य को महज एक बच्चे के जन्म के आधार पर सजा दे सकते हैं। यह हमारे समाज की बड़ी समस्या को दर्शाता है, जिसमें महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं मिलता और उनके अधिकारों की अनदेखी होती है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कानूनों की जरूरत है, साथ ही समाज को इस मानसिकता को बदलने के लिए जागरूक करना जरूरी है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा और भेदभाव के प्रति शून्य सहनशीलता नीति अपनानी होगी ताकि ऐसी घटनाओं पर काबू पाया जा सके और महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा मिल सके।