अब यह मजबूरी है पुरुष आयोग जरूरी है। 

अब यह मजबूरी है पुरुष आयोग जरूरी है। 

जी हां अतुल सुभाष की आत्महत्या ने फिर कहीं न कहीं कानून पर सवाल उठाए हैं । महिला शास्कतीकरण ,महिला आयोग और अनेकानेक महिला संगठन ,समाज का महिलाओं के प्रति नरम और आदर की भावनाएं, कानून का नरम रुख से महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए बनाए गए हैं ये अत्याचार और अपराध तो नहीं रुका परंतु कुछ महिलाएं इन सबका गलत फायदा उठा कर सीधे साधे पुरुषों को हंसिए पर जरूर ढकेलने में कामयाब हो जाती है ऐसे में घटना घटने के बाद हम छाती पीट कर भी क्या कर सकते हैं इसलिए सेव इंडियन फैमिली नामक संस्था ने अपनी आवाज को बुलंद करते हुए

आज दिनांक 24 दिसंबर दिन शनिवार को अतुल सुभाष को न सिर्फ श्रंद्धाजलि दी बल्कि उनके लिए न्याय और एक पुरुष आयोग का मांग तक कर डाला ये बिल्कुल नई पहल है क्योंकि अतुल जैसे न जाने कितने और भी है जो घुट कर रह जाते हैं और समाज और कानून के डर से या तो सबकुछ बर्दाश्त करते रहते हैं या फिर अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर लेते हैं प्रस्तुत है सहयोगी संदीप दत्ता के साथ पंकज सिन्हा की रिपोर्ट धनबाद के रणधीर वर्मा चौक से।

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