पिछले कुछ दिनों से रानीगंज थाना और ट्रैफिक की तरफ से संयुक्त रूप से रानीगंज के विभिन्न क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत फुटपाथ से छोटे दुकानदारों को हटाया जा रहा है कई मामलों में प्रशासन द्वारा इन दुकानदारों के सामानों को जब्त भी किया गया है। आरोप यह भी है कि पुलिस द्वारा कुछ जगहों पर लाठी चार्ज भी किया गया है। पूरे रानीगंज शहर में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। अब इस ज्वलंत मुद्दे में एक नया मोड़ आ गया है। रानीगंज के अधिवक्ता कैसर जमाल सिद्दीकी ने आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के आयुक्त को एक शिकायती पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने पुलिस प्रशासन पर इस अभियान को चलाने के क्रम में कुछ अनियमितता बरतने का आरोप लगाया है। कैसर जमाल सिद्दीकी ने पुलिस आयुक्त को लिखे पत्र में यह सवाल उठाया है कि आखिर किसके आदेश पर रानीगंज में यह अभियान चल रहा है।

उन्होंने कहा कि पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के आदेश के बिना पुलिस द्वारा गरीब दुकानदारों के सामानों को जब्त किया जा रहा वह भी बिना सीजर लिस्ट दिए। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में तो पुलिस द्वारा लाठी चार्ज का भी आरोप लगा है। यह भी जांच का विषय है कि आखिर किसके आदेश पर पुलिस द्वारा लाठी चार्ज की गई। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कानून मंत्री मलय घटक से अनुरोध किया कि वह इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लें और गरीब लोगों के साथ नाइंसाफी ना होने दें। उनका कहना है कि इन गरीब दुकानदारों के पास आय का दूसरा जरिया नहीं है तभी वह फुटपाथ पर दुकान लगाते हैं । उन्होंने राज्य में पूर्व सरकार के समय का हवाला दिया और कहा कि जब उनके निज़ाम में भी इस तरह का अभियान चलाया गया था तब आज के कानून मंत्री मलय घटक ने ही उन गरीब दुकानदारों को उनका हक दिलाया था। इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कानून मंत्री मलय घटक दोनों से अनुरोध किया कि वह इस मामले की गंभीरता को समझें और जल्द से जल्द ऐसी व्यवस्था करें ताकि यह गरीब दुकानदार वंचित न हो क्योंकि इन्हीं दुकानदारों की कमाई पर इनका पूरा परिवार गुजर बसर करता है। अगर इनको इसी तरह से हटा दिया गया तो लाखों लोग प्रभावित होंगे । रोजगार के अवसर घटते जा रहे हैं तभी यह गरीब लोग फुटपाथ पर दुकान लगाते हैं।