मानवता का विकास ही मानव अधिकार का लक्ष्य: डॉ. सुकल्याण मोइत्रा |

मानवता का विकास ही मानव अधिकार का लक्ष्य: डॉ. सुकल्याण मोइत्रा |

मानव अधिकार का लक्ष्य है मानव का विकास पूर्ण मानव के रूप में करना। ऐसे मानव तैयार करना जिसमें मानवता के तत्व पूर्ण रूप से विकसित हो। उक्त बातें राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ सुकल्याण मोइत्रा ने कही। वह विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला को बतौर अध्यक्ष संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि जब मानव में मानवता के तत्वों का पूर्ण विकास होगा तब विश्व में जितनी भी समस्याएं हैं वह स्वतः धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी। परंतु ऐसा तब हो पाएगा जब मानव को उनके अधिकार उपलब्ध होंगे और वह निर्बाध रूप से उन अधिकारों का उपभोग करेगा। ऐसे ही पूर्ण विकसित मानव निर्मित करने के उद्देश्य से ही 10 दिसंबर के दिन संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा 1948 में मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा जारी की गई थी।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ रुखसाना बानो ने बताया कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र ने आज के दिन का विषय रखा है “हमारे अधिकार, हमारा भविष्य, अभी” (Our rights our future, right now)। विद्यार्थियों में से प्रथम समसत्र की नैना और सूर्यकांत तथा तृतीय समसत्र की अनन्य पांडे ने अपने-अपने विचार रखें। कार्यशाला का संचालन शोधार्थी धर्मेंद्र कुमार ने किया। इस अवसर पर विभागीय प्राध्यापक डॉ अजय बहादुर सिंह, शोधार्थी रवि विश्वकर्मा, डीट (DEET) फेलो विकास कुमार यादव तथा दोनों समसत्र के विद्यार्थी अच्छी संख्या में उपस्थित हुए। अंत में मुकेश साहब द्वारा गाया, शैलेंद्र साहब द्वारा लिखी राजकपूर साहब की प्रिय गीत – किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी का दर्द मिल सके तो ले उधर, किसी के वास्ते तेरे दिल में हो प्यार, जीना इसी का नाम है – को सभी लोगों ने एक साथ गाया।

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