पाकुड़ में ‘प्रोजेक्ट इम्पैक्ट’ से विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वच्छता को मिलेगा बढ़ावा जिला प्रशासन की पहल पर प्रोजेक्ट इम्पैक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों, सीआरपी एवं बीआरपी के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य जिले के 3 से 18 वर्ष तक के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी एवं समान अवसरों पर आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। कार्यशाला में जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक एवं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट की टीम ने प्रोजेक्ट इम्पैक्ट के विभिन्न मॉड्यूल और गतिविधियों की जानकारी दी। कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए पूरे वर्ष की साप्ताहिक गतिविधि योजना, जबकि कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए छह महीने की शनिवार गतिविधि योजना तैयार की गई है। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में जीवनोपयोगी कौशल, स्वच्छता, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी, लैंगिक समानता एवं समावेशी व्यवहार विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। पीएमयू सदस्य सूरज कुमार मिश्रा ने ‘विद्यार्थियों की मार्गदर्शिका’ की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें विद्यालयी नागरिकता, बुनियादी शिष्टाचार, नशे से बचाव, सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता जैसे विषय शामिल हैं। इन गतिविधियों से विद्यार्थियों में जिम्मेदार नागरिकता और सामाजिक व्यवहार की समझ विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। पीएमयू सदस्य अविनाश कुमार ने कक्षा 8 से 12 के विद्यार्थियों के लिए तैयार ‘हम और जेंडर’ मॉड्यूल के बारे में

बताया। इसमें लैंगिक समानता, जेंडर संबंधी अवधारणाओं, रूढ़िवादिता, भेदभाव, सहमति, व्यक्तिगत सीमाओं, हिंसा से बचाव तथा डिजिटल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इसके अलावा थर्ड जेंडर एवं ट्रांसजेंडर के कानूनी अधिकारों और सहायता के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन एवं पोर्टल की जानकारी भी साझा की गई। पीएमयू सदस्य दिव्या ने प्राथमिक कक्षाओं के लिए तैयार ‘नन्हे विद्यार्थियों की मार्गदर्शिका’ के विषयों पर प्रकाश डाला। इसमें विद्यालय का वातावरण, साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक स्थानों की देखभाल, सुरक्षित व्यवहार, पर्यावरण संरक्षण और कहानियों के माध्यम से सीखने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। उपायुक्त ने कहा कि विद्यालयों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करना जरूरी है। बच्चों में अपने विद्यालय को स्वच्छ, सुंदर और बेहतर सुविधाओं से युक्त बनाने की प्रेरणा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले विद्यालयों को सम्मानित करने के साथ उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप जिला स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से सहयोग देने की पहल की जाएगी। उन्होंने विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालय, गार्डन एवं सोलर लाइट जैसी सुविधाओं के विकास पर भी विचार करने की बात कही। उपायुक्त ने शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को नियमित समीक्षा करने तथा क्षेत्र भ्रमण के माध्यम से योजनाओं की प्रगति का आकलन करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि प्रोजेक्ट इम्पैक्ट केवल अल्पकालिक गतिविधि नहीं, बल्कि विद्यालयों में दीर्घकालिक एवं सकारात्मक बदलाव लाने की पहल है। शिक्षकों को बच्चों को प्रेरित करने के साथ स्वयं भी इस अभियान के प्रति प्रतिबद्ध रहना होगा, ताकि आगामी तीन से चार वर्षों में विद्यालयों के वातावरण एवं कार्यप्रणाली में स्पष्ट सुधार दिखाई दे। उन्होंने ‘हम और जेंडर’ मॉड्यूल के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को बिना किसी भेदभाव के सम्मानजनक एवं सुरक्षित वातावरण में सीखने का अवसर मिलना चाहिए। बच्चों में लैंगिक समानता, समान अवसर, परस्पर सम्मान एवं जिम्मेदार व्यवहार की समझ विकसित करना आवश्यक है।
