सहियाओं एवं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा रैली एवं सेमिनार का आयोजन सिविल सर्जन डॉ० अशोक कुमार के द्वारा कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। साथ ही डॉ० शशि जायसवाल अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ० कपिल मुनी प्रसाद, जिला आर.सी.एच. पदाधिकारी डॉ० अमरेश कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी कुपोषण उपचार केन्द्र, डॉ० सुभाष प्रसाद, जिला कार्यक्रम प्रबंधक समरेश कुमार सिंह, जिला डाटा प्रबंधक दिवाकर अम्बष्टा ने संयुक्त रूप से विश्व आयोडीन न्यूनता विकार नियंत्रण दिवस के अवसर पर रैली को हरी झण्डा दिखाकर जागरूकता हेतु रवाना किया गया तथा सिविल सर्जन कार्यालय सभागार में विश्व आयोडीन न्यूनता विकार नियंत्रण दिवस उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित किया गया। सिविल सर्जन हजारीबाग द्वारा उन्मुखीकरण कार्यशाला में विश्व आयोडीन न्यूनता विकार नियंत्रण दिवस पर बोलें कि आयोडीन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जिसकी अल्प मात्र शरीर की क्रियाओं के नियंत्रण हेतु अत्यन्त आवश्यक है। शरीर में आयोडीन की उपलब्धता, आयोडीन युक्त नमक के उपयोग से ही संभव है। आयोडीन की कमी से होने वाले दुष्परिणाम लाईलाज हैं, किन्तु आयोडीन नमक के उपयोग से इनसे बचा जा सकता है। आयोडीन युक्त नमक सभी जनवितरण प्रणाली दुकानों तथा बाजार में उपलब्ध है। इस हेतु नमक सैंपल एवं 6 से 12 साल के बच्चों के यूरिन सैंपल एकत्र करने व जाँच हेतु सघन अभियान 21 अक्टूबर, 2026 से पूरे सप्ताह चलाया जाना है। जाँच हेतु IDD Monitoring Laboratory, IDD Cell, Health Directorate, RCH Namkum Ranchi भेजना सुनिश्चित करेंगे। डॉ० कपिल मुनी प्रसाद, जिला आर.सी.एच. पदाधिकारी ने इस हेतु नमक विक्रेताओं हेतु दिशा-निर्देश दिये कि क्या न करें – नमक का भण्डारण खुले में न करें। उद्योग में उपयोग आने वाले

नमक का भण्डारण खाने वाले नमक के साथ न करें। कम गुणवत्ता (15 पी.पी.एम. से कम) वाले नमक की खरीद-बिक्री मानव उपयोग हेतु न करें। क्या करें – नमक का भण्डारण सूखे स्थान तथा सूर्य की रोशनी से दूर करें। उद्योग में उपयोग होने वाले नमक का भण्डारण अलग करें तथा मानव उपयोग हेतु नहीं है (Not for Human Consumption) लिखकर रखें। 15 पी.पी.एम. से अधिक मानक वाले नमक का ही व्यापार करें। डॉ० शशि जायसवाल अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने नमक में आयोडीन की गुणवत्ता संरक्षित रखने हेतु स्कूलों तथा आंगनवाड़ी केन्द्रों की रसोई हेतु महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है कि क्या न करें – गीले हाथों से नमक को न निकालें। नमक को खुले डब्बे में न रखें। नमक को आग के पास न रखें। नमक का उपयोग भोजन बनाने के शुरुआत में न करें। क्या न करें – नमक को निकालने के लिए सूखे चम्मच का उपयोग करें। नमक को हवाबंद सूखे डब्बे में रखें। नमक को आग से दूर रखें। नमक को खाने पकाने के अन्त में उतारते समय डालें तथा खाना ढक कर पकायें। 15 पी.पी.एम. से अधिक मानक वाले नमक का ही उपयोग करेंगे। कार्यक्रम में डॉ० शशि जायसवाल अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ० कपिल मुनी प्रसाद, जिला आर.सी.एच. पदाधिकारी डॉ० अमरेश कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी कुपोषण उपचार केन्द्र, डॉ० सुभाष प्रसाद, जिला कार्यक्रम प्रबंधक समरेश कुमार सिंह, जिला डाटा प्रबंधक दिवाकर अम्बष्टा, जिला बी०बी०डी० सलाहकार मेमर सुल्तान, जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट–आई०डी०एस०पी० डॉ० जावेद अहमद, डाटा प्रबंधक आई०डी०एस०पी० रूपलाल गोप, दुकलाल प्रसाद, सभी बी०टी०टी० एवं सहिया उपस्थित रहें।
