धनबाद में सरकारी लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जो व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक तरफ आम आदमी के नाम में एक अक्षर की गलती हो जाए, तो उसे सुधारने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, वहीं दूसरी तरफ सड़क पर लगे सरकारी बोर्ड पर ही शहर के नाम की स्पेलिंग गलत लिख दी गई है। सवाल है, आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा? धनबाद के बिरसा मुंडा पार्क के समीप आठ लेन सड़क पर लगे लोकेशन बोर्ड पर ‘कतरास’ की जगह ‘कर्तस’ लिखा हुआ है। यह बोर्ड सड़क से गुजरने वाले लोगों को रास्ता और स्थान की जानकारी देने के लिए लगाया गया है, लेकिन जब बोर्ड पर ही जगह का नाम गलत हो, तो बाहर से आने वाले लोगों को सही स्थान पहचानने में परेशानी हो सकती है।

अब जरा व्यवस्था का दोहरा रवैया देखिए! आम आदमी के नाम में एक अक्षर की गलती हो जाए, तो दस्तावेज सुधारने के लिए उसे दफ्तर-दर-दफ्तर भटकना पड़ सकता है। लेकिन जब सरकारी बोर्ड पर ही गलती हो, तो क्या इसकी जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए? सवाल धनबाद नगर निगम और संबंधित विभाग से है कि आखिर बोर्ड लगाने से पहले इसकी जांच क्यों नहीं की गई? क्या सरकारी काम में इतनी बड़ी गलती को नजरअंदाज करना उचित है? अब जरूरत है जिम्मेदारी तय करने की, बोर्ड पर लिखी गलती को तत्काल सुधारने की और यह सुनिश्चित करने की कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।

