हजारीबाग। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के तत्वावधान में बुधवार को हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड अंतर्गत दूधमटिया वन क्षेत्र में वृक्ष रक्षाबंधन सह पर्यावरण मेला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व सांसद सह झारखंड राज्य विस्थापित संघर्ष मोर्चा एवं झारखंड किसान सभा के अध्यक्ष भुवनेश्वर प्रसाद मेहता बतौर अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान वन एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर विभिन्न गतिविधियों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। इस अवसर पर पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल किसी एक विभाग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने वृक्ष रक्षाबंधन के सूत्रधार महादेव महतो के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से आम लोगों में पेड़-पौधों एवं जंगलों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने

कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। अधिक से अधिक पौधरोपण के साथ मौजूदा पेड़-पौधों की रक्षा भी की जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने की अपील करते हुए आमजनों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया। झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि जंगल और वृक्ष आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर ही आने वाली पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा सकती है। कार्यक्रम के दौरान वन एवं पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कलाकारों एवं छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को जंगल बचाने, वृक्ष लगाने, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालयों के शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर आंदोलनकारी नेता चंद्रनाथ भाई पटेल, अनंत कुमार आर्य, पूर्व मुखिया महेंद्र राम सहित वन विभाग के अधिकारी, पर्यावरण समिति के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।
